असम से रायपुर लौटे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने SIR को लेकर भाजपा पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर रही है। अब हालात ऐसे हैं कि पहले जनता सरकार चुनती थी, लेकिन अब सरकार मतदाता चुन रही है। इसी वजह से खोज-खोज कर मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा रहे हैं।
भूपेश बघेल ने कहा कि यह प्रक्रिया सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक मंशा से प्रेरित नजर आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार साधु-संतों तक का अपमान करने से नहीं चूक रही और लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों को ताक पर रखा जा रहा है।
आखिरी दिन तक 1.97 लाख आवेदन, 19.13 लाख नाम कटे
दावा-आपत्ति की आखिरी तारीख यानी 22 जनवरी तक 1.97 लाख आवेदन पहुंचे। प्रारंभिक मतदाता सूची से 19.13 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए, जबकि नाम जोड़ने और इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जो पहली बार मतदाता बनने के लिए आवेदन कर रहे हैं।
23 दिसंबर को प्रारंभिक सूची के प्रकाशन के समय प्रदेश में कुल 27.34 लाख नाम हटाए गए थे। इनमें से 6.42 लाख नाम मृत्यु के आधार पर हटाए गए, जबकि शेष 19.13 लाख लोगों के बारे में माना गया कि वे स्थानांतरित हो चुके हैं।
अभी सत्यापन, एसआईआर में नहीं जुड़ेंगे नाम
चुनाव आयोग के अनुसार, अब केवल दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। करीब 6 लाख लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, जिन्हें अनट्रेस मानते हुए 13 में से कोई एक वैध दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। यह प्रक्रिया 14 फरवरी तक चलेगी और 21 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब जितने भी नाम जुड़ेंगे, वे नए मतदाता के रूप में ही जोड़े जाएंगे, चाहे नाम पहले कट चुका हो या पहली बार आवेदन किया गया हो।
बीएलओ को सौंपा गया जिम्मा
एसआईआर के बाद बीएलओ को एक और जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिन मतदाताओं के नाम 2025 की सूची में हैं लेकिन 2003 की सूची में नहीं, उनके संदर्भों की जांच अब बीएलओ करेंगे। रिश्तेदारों के पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा दस्तावेजों में अंतर के चलते कई नाम अटके हुए हैं।