अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों के बीच खूनी संघर्ष

Chhattisgarh Crimesबिलासपुर: अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) में दो से ढाई साल उम्र के एक बाघ का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। दरअसल, ट्रैप कैमरे में दो बाघों के बीच खूनी संघर्ष की तस्वीर सामने आई थी, जिसमें दोनों बाघ गंभीर रूप से घायल दिखाई दे रहे थे।

इसके बाद एटीआर की टीम घायल बाघों की तलाश में जंगल में सर्चिंग के लिए निकली। लेकिन, तलाश के दौरान टीम के होश तब उड़ गए, जब उन्हें एक तीसरे बाघ का शव मिला। बाघों के लिए संरक्षित टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत को बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही अधिकारी सकते में हैं। मृत बाघ का सोमवार को पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया जाएगा।

अचानकमार टाईगर रिजर्व के अचानकमार रेंज अंतर्गत कक्ष क्रमांक 120 आरएफ में बाघ का शव मिला है। बाघ की लाश पूरी तरह सड़ी हुई है। इसलिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि मौत कब हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि टाइगर रिजर्व के अधिकारी या कर्मचारियों का इस घटना की भनक तक नहीं थी। अभी भी प्रबंधन इससे अनभिज्ञ रहता है।

यदि ट्रैप कैमरे में दो बाघों के बीच संघर्ष की तस्वीर नहीं आती। वर्तमान में टाइगर रिजर्व के अंदर बाघों की गणना के ट्रैप कैमरे लगाए गए। बीच-बीच में इन कैमरों में लगे चिप को निकालकर, उनमें जो तस्वीर सेव होती है, उसे कम्प्यूटर सिस्टम में सेवा किया जाता है।

इस व्यवस्था के तहत अमला चिप निकाला। चिप में दोनों बाघों के बीच संघर्ष और घायल होने की तस्वीर देखकर प्रबंधन हरकत में आया और टीम बनाकर घायल बाघों की तलाश करने के निर्देश दिए गए।

रविवार को सर्चिंग जारी थी, तभी मृत बाघ नजर आया। टीम ने जब इस घटना की सूचना दी तो अफसरों के हाथ- पैर फुल गए। आनन-फानन में अफसर से लेकर पूरा अमला घटना स्थल पहुंचा। इस बीच शव का परीक्षण व आसपास एरिया की सर्चिंग की गई। उन्हें इस बाद का अनुमान था कही शिकार करने की कोशिश तो नहीं हुई।

हालांकि बाघ का शिकार नहीं हुआ है। क्याेंकि दांत, नाखून से लेकर उसके शरीर के अन्य अंग मौजूद थे। इसलिए प्रथम दृष्टया आपसी संघर्ष को ही मौत का कारण माना जा रहा है। सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आएगी। सोमवार को अधिकारियों की मौजूदगी में पशु चिकित्सकों की टीम मृत बाघ का पोस्टमार्टम करेगी।

घायल बाघ अब भी लापता

जिन दो बाघों के बीच खूनी संघर्ष हुआ है, वजह अब तक नजर नहीं आए हैं। जिस तरह उनके बीच फाइटिंग हुई, उसे लेकर प्रबंधन की चिंता बढ़ी हुई है। यही कारण है कि पूरी टीम को घायल बाघों की तलाश में लगा दिया गया है। उनका नजर आना बेहद आवश्यक है। क्योंकि वह घायल है और दोनों को उपचार की जरुरत है। यदि इलाज नहीं मिलता है तो जख्म का गहरा घाव बनकर उनके लिए खतरनाक बन सकता है।

एक संख्या हो गई कम

अचानकमार टाइगर रिजर्व की हमेशा से बाघों की संख्या को लेकर अवहेलना होती रही है। यहां बाघ बहुत कम संख्या में हैं। जितने हैं, प्रबंधन उनकी भी सुरक्षा कर पाने में नाकाम है। इस घटना के बाद एक संख्या और कम हो गई है। प्रबंधन के आंकड़ों के अनुसार 18 बाघों में से अब केवल 17 ही बच गए है। हालांकि प्रबंधन इसे क्षति मान रहा है। जबकि जानकार इस घटना को प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा मान रहे हैं।

क्या कर रहा टाइगर प्रोटक्शन फोर्स

बाघ की मौत सात से आठ दिन पहले हुई है, शव देखकर फिलहाल यही माना जा रहा है। इस लापरवाही के जितने जिम्मेदार वन परिक्षेत्र अधिकारी, डिप्टी रेंजर व बीट गार्ड है, उतने ही टाइगर प्रोटक्शन फोर्स भी है। प्रबंधन की ओर से फोर्स के सदस्यों को वाहन से लेकर अन्य संसाधन मुहैया कराए गए हैं। बाघों की सुरक्षा व निगरानी केवल यही दायित्व मिला है, उसमें भी फोर्स के सदस्य खरा नहीं उतर पा रहे हैं।

संयोग: एक साल पहले 25 जनवरी को बाघिन की मौत हुई थी

यह अजीब संयोग ही है कि एक साल पहले 25 जनवरी को ही अचानकमार टाइगर रिजर्व में एक बाघिन की मौत की घटना सामने आई थी। मौत की वजह बाघ से संघर्ष था। बाघिन के गर्दन से लेकर शरीर के कई हिस्से में दांत गढ़ने के निशान थे। इसके अलावा श्वास नली भी फटी हुई थी। यह घटना लमनी रेंज अंतर्गत कक्ष क्रमांक 339 आरएफ की थी, जहां बाघिन का शव मिला।पैदल गार्ड टीम ने जब इस घटना की सूचना दी तो अफसर सकते में आ गए। आनन- फानन में अफसर से लेकर पूरा अमला घटना स्थल पहुंचा। वन्यप्राणी चिकित्सक डा. पीके चन्दन एवं मुंगेली के शासकीय पेनल पशु चिकित्सकों, एनटीसीए के प्रतिनिधि, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) के प्रतिनिधि के समक्ष पोस्टमार्टम किया गया। उन्हें पोस्टमार्टम के दौरान गर्दन पर दांत के निशान, श्वासनली के फटने, फेफड़े की श्रृंकिंग, पूरे शरीर में खरोच के निशान मिले।