छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों के खिलाफ सोमवार को सवर्ण समाज में आक्रोश देखने को मिला

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ के बिलासपुर में यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों के खिलाफ सोमवार को सवर्ण समाज में आक्रोश देखने को मिला। समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में रैली निकालकर विरोध जताया।

रैली देवकीनंदन चौक से शुरू होकर कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और कलेक्ट्रेट का घेराव कर हंगामा किया। इस दौरान कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया।

“यूजीसी एक्ट वापस लो” लगे नारे

दरअसल, सोमवार दोपहर देवकीनंदन चौक से जैसे ही रैली शुरू हुई, पूरा इलाका नारेबाजी से गूंज उठा। हाथों में बैनर-तख्तियां लिए सवर्ण समाज के लोग यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ आक्रोश जताते हुए कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े। “यूजीसी एक्ट वापस लो” जैसे नारों से माहौल गरमाया रहा।

दोपहर में रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने घेराव कर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान समाज के बुजुर्गों ने कहा कि, यूजीसी के नए नियम शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ हैं और इससे समाज में असंतुलन पैदा होगा।

आरक्षण नहीं लेने वाले सभी समाज के लोग आए नजर

प्रदर्शन में केवल सवर्ण समाज ही नहीं, बल्कि आरक्षण का लाभ नहीं लेने वाले अन्य समाजों के लोग भी शामिल नजर आए। इससे यह साफ दिखा कि मुद्दा सिर्फ एक वर्ग का नहीं, बल्कि व्यापक जनहित से जुड़ा है।

प्रदर्शन के दौरान यूजीसी के नए एक्ट को शिक्षा और समाज के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारी “यूजीसी एक्ट वापस लो”, “शिक्षा के साथ खिलवाड़ बंद करो” जैसे नारे लगाते नजर आए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार तय करे अपना रूख

समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि, आजादी के बाद से सवर्ण समाज के साथ अन्याय हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए जो फैसला दिया है, वो सर्व समाज के हित में है। संविधान में उल्लेख है कि भारत में किसी धर्म और भेदभाव नहीं होना चाहिए। लेकिन, हमेशा से सवर्ण के खिलाफ बातें होती है।

संविधान में कानून बनाया है। जिसके तहत कानून के खिलाफ सभी वर्ग के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। गुरु घासीदास बाबा ने भी कहा है कि मनखे-मनखे एक समान है। लेकिन, वर्तमान में समाज को बांटने के लिए आरक्षण लागू किया है।

जिसे अब शिक्षा के मंदिर तक फैलाकर गंदगी की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर रोक दी है। अब केंद्र सरकार को अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वो इस काला कानून को वापस लेगी या नहीं।