रायगढ़ जिले के घरघोड़ा रेंज में दो हाथी शावकों की मौत हो गई। दोनों के शव कुरकुट नदी में मिले हैं। शव करीब 3-4 दिन पुराना बताया जा रहा है, जिस पर छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य गोपाल अग्रवाल का कहना है कि इस लापरवाही पर कार्रवाई होनी चाहिए। इसकी शिकायत दिल्ली में की जाएगी।
इससे पहले युवा कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष उस्मान बेग ने भी कलेक्टर और डीएफओ को आवेदन सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की थी। दरअसल, वन विभाग को घटना की जानकारी बुधवार को मिली। जांच में सामने आया कि दोनों हाथियों की मौत करंट की चपेट में आने से हुई है।
मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन लापरवाही बरतने वाले वनकर्मियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि शव कई दिनों तक नदी में पड़े रहे, फिर भी संबंधित वनकर्मियों को इसकी जानकारी नहीं हुई। बाद में ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद वन अमला मौके पर पहुंचा।
लापरवाही पर कार्रवाई की मांग
छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य गोपाल अग्रवाल ने कहा कि इस मामले में लापरवाही करने वाले वनकर्मियों पर कार्रवाई होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि मामले की शिकायत दिल्ली में आइजीपीएफ से की जाएगी।
गोपाल अग्रवाल ने कहा कि करंट लगने से लगातार वन्यजीवों की मौत हो रही है। इस मुद्दे पर वन्यजीव बोर्ड की बैठक में भी चर्चा हुई थी, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका। जंगल क्षेत्रों में निगरानी कमजोर है।
इसी कारण शिकारी करंट का उपयोग कर वन्यजीवों का शिकार करने में सफल हो रहे हैं। नियमित जंगल भ्रमण नहीं हो रहा है, साथ ही अधिकारियों की मॉनिटरिंग भी कमजोर है। इससे वन्यजीवों के साथ इंसानों की जान भी खतरे में पड़ रही है।
विभाग ने अब तक नहीं की कार्रवाई
घरघोड़ा प्रभारी रेंजर विक्रांत कुमार ने बताया कि यह मामला छर्राटांगर सर्किल का है। वहां बीटगार्ड मुकेश राठिया और एक प्रशिक्षु आरओ पहले पदस्थ रहे हैं। प्रशिक्षु आरओ का कुछ दिन पहले दूसरे स्थान पर स्थानांतरण हो चुका है।
प्रभारी रेंजर ने कहा कि डॉक्टर के बताए अनुसार हाथी का शव 3/4 दिन पुराना हो सकता है और कुछ अंग लिक्विफाइड हो गए थे, इसलिए सैंपल लैब भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी 3 हाथियों की मौत पर हुई थी कार्रवाई
इससे पहले अक्टूबर 2024 में तमनार रेंज के समारुमा सर्किल के कचकोबा परिसर के चूहकीमार नर्सरी क्षेत्र में तीन हाथियों की मौत हुई थी। जांच में बीटगार्ड की लापरवाही सामने आई थी।
इसके बाद तत्कालीन डीएफओ स्टाइलों मंडावी ने परिसर रक्षक सन्यासी सिदार को निलंबित कर दिया था। समारुमा सर्किल प्रभारी के निलंबन के लिए सीसीएफ बिलासपुर को अनुशंसा भेजी गई थी, जिसके बाद उसे भी सस्पेंड किया गया था।