छत्तीसगढ़ के कबीरधाम में अज्ञात महिला की हत्या मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला कि महिला शादीशुदा थी और उसके दो बच्चे भी हैं। उसका आरोपी के साथ अफेयर था। वो उसके साथ पुणे में लिव इन रिलेशन में रह रही थी। बॉयफ्रेंड से शादी के लिए जिद कर रही थी। लेकिन आरोपी का पिता समाज में बदनामी के डर से बेटे की शादी उस महिला से नहीं करना चाहता था।
इसी वजह से उसने दोनों को गांव बुलाया, ताकि बैठकर मामला सुलझाया जा सके। लेकिन बात नहीं बनी, इसी गुस्से में युवक और पिता ने महिला को कवर्धा जिले में रानीदहरा झरना घूमने के बहाने ले गए। वहां दोनों ने अपने सहयोगी के एक साथ मिलकर महिला पर पत्थर से हमला कर उसे मार डाला। इसके बाद शव को रानीदहरा जलप्रपात में फेंक दिया, ताकि सबूत मिट जाएं।
पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला बोड़ला थाना के रानीदहरा जलप्रपात के पास का है।
जानकारी के अनुसार, 19 मार्च की सुबह कुछ ग्रामीण बोड़ला विकासखंड स्थित रानी दहरा जलप्रपात की ओर गए थे और तभी उनकी नजर पानी में तैरते शव पर पड़ी। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को पानी से बाहर निकालकर कब्जे में ले लिया। शव की हालत ऐसी थी कि पहचान करना मुश्किल था। इसके बाद जांच शुरू की।
दो दिन की जांच के बाद पता चला कि महिला मुंगेली जिला के चौकी खुड़िया के दरवाजा गांव की है। महिला का नाम सुखबती बैगा (24 साल) है।
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि सुखबती का गांव के ही रहने वाले देवेंद्र जायसवाल (26 साल) के साथ अफेयर चल रहा था। दोनों करीब 3-4 महीने पहले घर-परिवार छोड़कर पुणे भाग गए थे और वहां लिव-इन रिलेशन में रह रहे थे।
सुखबती पहले से शादीशुदा थी और उसके दो बच्चे भी हैं। अब वह देवेंद्र पर शादी करने का दबाव बना रही थी।
लेकिन देवेंद्र के पिता केशव प्रसाद, इस रिश्ते के खिलाफ था। उसे डर था कि समाज में बदनामी होगी। इसी वजह से उसने दोनों को पुणे से गांव “दरवाजा” बुलाया, ताकि बैठकर मामला सुलझाया जा सके।
गांव में बातचीत हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकला। सुखबती शादी पर अड़ी रही और देवेंद्र का परिवार तैयार नहीं हुआ। इसी बात को लेकर देवेंद्र ने अपने पिता केशव प्रसाद के साथ मिलकर रास्ते से हटाने का प्लान बनाया।
16 मार्च को देवेंद्र घूमने के बहाने सुखबती को रानीदहरा झरना ले गया। वहां उसके साथ केशव प्रसाद और गांव का एक और साथी मनोज पटेल भी मौजूद था।
जैसे ही मौका मिला, तीनों ने मिलकर शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच सुखबती के सिर पर पत्थर से हमला कर हत्या कर दी। इसके बाद सबूत छिपाने के लिए से शव को झरने में फेंक दिया