15 घंटे सड़क जाम, लिखित आश्वासन के बाद भी राजापडा़व क्षेत्र के 5 पंचायत आज भी अंधेरे में – क्या आदिवासी होना अपराध है

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*पतंग कुमार मरकाम*

*अध्यक्ष*

*जय अंबेडकरवादी युवा संगठन राजापडा़व क्षेत्र

*पूरन मेश्राम/मैनपुर। 21वीं सदी में जब देश चांद पर पहुंँच गया है,तब गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक का राजापडा़व क्षेत्र के रहवासी आज भी लालटेन युग में जीने को मजबूर है। 5 पंचायतों के लगभग 25 से 30 गांवों में आज तक बिजली का एक भी खंबा नहीं लगा।

*वैकल्पिक के नाम पर धोखा*

शासन ने सौर ऊर्जा के नाम पर खराब बैटरी और इन्वार्टर दिया है। ये बिजली मात्र आधा घंटा ही जलती है। कहीं-कहीं तो महीनों से बंद पड़ी है। रात होते ही पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब जाता है। सांप-बिच्छू के डर से लोग घरों में कैद,बच्चों की पढ़ाई चौपट,मोबाइल चार्ज करने खरीदा हुआ बैटरी वाला टार्च पर निर्भर

*खंबे लगे, फिर उखाड़ ले गए – जनता के साथ मजाक*।

पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार में बिजली के खंबे गाड़ दिए गए थे,वायरिंग पूरी हो चुकी थी।

उम्मीद जगी थी कि अब अंधेरा छंँटेगा पर अचानक प्रशासन ने सारे खंबे-तार उखाड़कर वापस ले लिए। हवाला दिया गया – *”टाइगर रिजर्व क्षेत्र है, यहां ऊपर से लाइन नहीं जा सकती।”*

*15 घंटे का जाम, लिखित वादा,फिर भी धोखा*

जनवरी 2025 में राजापडा़व क्षेत्र के आक्रोशित हजारों ग्रामीणों ने 15 घंटे तक नेशनल हाईवे जाम किया था। तब जिला प्रशासन ने लिखित में आश्वासन दिया था कि 6 महीने के अंदर बजट पास कराकर भूमिगत लाइन से बिजली पहुंँचाई जाएगी।विधानसभा में बजट पास कराने की बात कही गई थी। आज 4 महीने बीत गए, न बजट पास हुआ, न एक इंच तार बिछा।प्रेस विज्ञप्ति में जय अंबेडकरवादी युवा संगठन के अध्यक्ष पतंग मरकाम ने कहा कि प्रशासन कहता है ऊपर से लाइन नहीं जाएगी,भूमिगत में करोड़ों खर्च होंगे। सवाल ये है कि जब पूरे देश में टाइगर रिजर्व के पास से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है,तो राजापडा़व क्षेत्र के गरीब आदिवासियों के लिए नियम अलग क्यों। क्या भूमिगत लाइन के नाम पर बजट को लटकाना और फिर घोटाला करना मकसद है।

श्री मरकाम ने आगे कहा कि हमारी 3 स्पष्ट मांगें हैं

जिला प्रशासन गरियाबंद की ओर से दिया गया लिखित आश्वासन के आधार पर समय सीमा के अंदर अंदर राजापडा़व क्षेत्र के 5 पंचायतों में बिजली पहुंँचाने का काम शुरू हो, चाहे भूमिगत हो या ऊपर से। टाइगर रिजर्व का बहाना अब नहीं चलेगा। जनवरी 2026 के लिखित आश्वासन पर जिला प्रशासन सार्वजनिक जवाब दे कि अब तक काम क्यों नहीं शुरू हुआ।दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही हो।जब तक स्थाई बिजली नहीं पहुंँचती, तब तक हर गाँव में हाई-कैपेसिटी सोलर सिस्टम लगे जिससे कम से कम 8 घंटे लाइट जले। अभी वाला आधा घंटे का टॉर्च सिस्टम बंद होना चाहिए। यदि तय समय सीमा के अंदर काम शुरू नहीं हुआ तो राजापडा़व क्षेत्र की जनता इस बार 15 घंटे नहीं, 15 दिन के लिए चक्का जाम करेगी। जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और राज्य सरकार की होगी। अंधेरे में रहने वाले आदिवासी अब उजाले के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।