रायपुर में खारून नदी की सफाई के लिए रविवार को “मोर खारून-मोर सम्मान” अभियान चलाया गया। महापौर मीनल चौबे, निगम के जनप्रतिनिधि, अधिकारी और सैकड़ों सफाईकर्मी नदी में उतरकर जलकुंभी निकालते नजर आए। लेकिन अभियान की तस्वीरों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सफाई करने वालों की सुरक्षा किसी की प्राथमिकता नहीं है?
तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि नदी में उतरकर सफाई कर रहे लोगों के हाथों में ग्लव्स नहीं हैं, पैरों में सुरक्षा बूट नहीं हैं और न ही किसी तरह का सेफ्टी गियर नजर आ रहा है। दूषित पानी, कचरे और जलकुंभी के बीच लोग सीधे संपर्क में आकर सफाई करते दिखे।तीन महीने पहले रामकृष्ण केयर अस्पताल परिसर में सीवेज चैंबर की सफाई के दौरान तीन मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई थी। एक मजदूर को बचाने उतरे दो अन्य मजदूर भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए थे। उस हादसे के बाद सुरक्षा मानकों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे।