बस्तर को अब आर्थिक विकास, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं के नए मॉडल के रूप में विकसित करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बस्तर के लिए विशेष विकास रोडमैप पेश किया।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। अगले तीन वर्षों में बस्तर के परिवारों की मासिक आय बढ़ाकर 30 हजार रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल बस्तर के करीब 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपए से कम है। इसे बढ़ाने के लिए खेती, पशुपालन, वन उपज, पर्यटन और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का फोकस ऐसे स्थायी आय स्रोत विकसित करने पर है।
इनसे आदिवासी और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। बस्तर में डेयरी मॉडल को लागू कर आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे दूध उत्पादन बढ़ेगा और गांवों में डेयरी केंद्र, संग्रहण, परिवहन तथा स्थानीय बाजार जैसी आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे।
खेती को लाभकारी बनाने के लिए 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक लागत की दो बड़ी सिंचाई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। चित्रकोट सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
इससे होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र की योजनाओं की भी जानकारी दी।
सेमीकंडक्टर से एआई तक, तकनीक आधारित विकास पर फोकस : मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 435 सुधार लागू किए गए हैं तथा निवेश को बढ़ावा देने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत किया गया है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दो इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। एग्रीस्टैक योजना से 33 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है।
सरकार ने एआई मिशन, पर्यटन मिशन, खेल मिशन, अधोसंरचना मिशन और स्टार्टअप-निपुण मिशन शुरू किए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, ओडीओपी योजना से स्थानीय उत्पादों को नए बाजार मिले हैं। फरवरी 2026 तक राज्य का निर्यात 761.76 करोड़ रुपए पहुंच गया, जिसमें खुशबूदार चावल का सबसे बड़ा योगदान रहा।