छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से बने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित करने की तैयारी ने प्रदेश की राजनीति गरमा दी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से पीपीपी मॉडल की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर सरकारी अस्पताल को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस कमेटी के पूर्व जिलाध्यक्ष और बेलतरा के कांग्रेस प्रत्याशी रहे विजय केशरवानी ने विधायक सुशांत शुक्ला पर निशाना साधा है। वहीं, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा है कि सरकार का उद्देश्य केवल बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव ने 23 जून को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को पत्र लिखकर बताया कि, कोनी स्थित 240 बेड सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और 100 बेड कैंसर केयर अस्पताल का संचालन पीपीपी मॉडल पर कराने का निर्णय लिया गया है।
इसके लिए कंसल्टेंट कंपनी केपीएमजी (KPMG) से संशोधित रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP), लाइसेंस एग्रीमेंट और फाइनेंशियल मॉडल तैयार कराया गया है। अब टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए टेंडर प्रोसेसिंग कमेटी गठित किए जाने की तैयारी है।
कांग्रेस का आरोप- जनता के पैसों से बना अस्पताल, फिर निजी हाथों में क्यों?
बेलतरा विधानसभा के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी विजय केशरवानी, जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री और शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने मीडिया से बातचीत करते हुए सरकार के फैसले पर सवाल उठाए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अस्पताल सरकारी जमीन पर जनता के टैक्स के पैसे से बनाया गया है और मशीनें भी सरकारी हैं। ऐसे में इसके संचालन के लिए निजी संस्था को जिम्मेदारी देने की क्या जरूरत है? उनका आरोप है कि पीपीपी मॉडल लागू होने से गरीब मरीजों के मुफ्त इलाज पर असर पड़ सकता है और इलाज महंगा हो सकता है।
कांग्रेस ने पूछा- अस्पताल ठीक चल रहा है तो PPP की जरूरत क्यों?
विजय केशरवानी ने कहा कि प्रधानमंत्री के उद्घाटन और मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद भी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्टाफ की कमी बनी हुई है। सरकार पहले रिक्त पद भरे, उसके बाद निजीकरण की बात करे।
उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि यदि अस्पताल बेहतर तरीके से संचालित हो रहा है तो फिर पीपीपी मॉडल लागू करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? उन्होंने इसकी शर्तें सार्वजनिक करने की मांग की।
जगदलपुर मॉडल का हवाला, महंगे इलाज की आशंका
कांग्रेस ने दावा किया कि जगदलपुर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पीपीपी मॉडल लागू होने के बाद ओपीडी शुल्क और जांच की दरें बढ़ गई हैं। पार्टी नेताओं ने आशंका जताई कि बिलासपुर में भी यही व्यवस्था लागू होने पर गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
भाजपा का पलटवार- कांग्रेस फैला रही भ्रम
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और बिलासपुर के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि, केंद्र और राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनें और विशेषज्ञ सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं ताकि मरीजों को बड़े शहरों का रुख न करना पड़े। इसका लाभ क्षेत्र के लोगों को मिलेगी।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर कांग्रेस ने कुछ नहीं किया
डिप्टी सीएम ने साव ने कहा कि, कांग्रेस के कार्यकाल में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक ढेले का भी काम नहीं हुआ है। केंद्र सरकार से स्वीकृत कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए बार-बार पत्र लिखने के बाद भी कांग्रेस की राज्य सरकार ने पैसे नहीं दिए, जो निरस्त होने वाला था।
जब भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया, तब जाकर कांग्रेस ने राशि जारी की। पांच साल में स्वास्थ्य सुविधाओं की दुर्दशा कांग्रेस ने की है। कांग्रेस बेवजह प्रलाप कर रही है।
कांग्रेस में विजय की क्या प्रासंगिकता है- एमएलए सुशांत
वहीं, विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि वर्षों तक स्वास्थ्य व्यवस्था को बदहाल रखने वाली कांग्रेस आज जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। भाजपा सरकार का लक्ष्य बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, न कि किसी का अहित करना।
उन्होंने विजय केशरवानी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीति में उनकी कोई प्रासंगिकता है। कांग्रेस में वो प्रासंगिक नहीं है और न ही उनकी कोई भूमिका नहीं है। कांग्रेस को अपने पांच साल के कुकर्मो को देखना चाहिए।
अब स्वास्थ्य नहीं, सियासत का भी बड़ा मुद्दा
कोनी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का पीपीपी मॉडल अब केवल स्वास्थ्य व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे सरकारी अस्पताल के निजीकरण का मुद्दा बनाकर आंदोलन की तैयारी में है, जबकि भाजपा इसे स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का कदम बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और गरमा सकता है।