राजधानी रायपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर अभनपुर विकासखंड के बिरेझर गांव में मां मातंगी देवी धाम स्थित है। यह धाम अपनी अनोखी धार्मिक परंपराओं के कारण श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर की सबसे विशेष मान्यता घड़ी बांधने की है।
घड़ी का बंद होना अशुभ संकेत माना जाता है। वहीं इस मंदिर में बांधी गई घंड़ी का बंद होना जीवन में अच्छे समय की शुरुआत का संकेत माना जाता है। श्रद्धालु अपनी मन्नत मांगकर मंदिर परिसर में घड़ी बांधते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जब वह घड़ी बंद हो जाती है, तो व्यक्ति का अच्छा समय शुरू होने लगता है।
इसी विश्वास के चलते मंदिर परिसर में सैकड़ों घड़ियां बंधी हुई दिखाई देती हैं। इसके अलावा यहां घंटी, ताला और नारियल बांधने की भी परंपरा है। छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और मनोकामना लेकर पहुंच रहे हैं।
घंटी-ताला और नारियल बांधने की भी परंपरा
मां मातंगी देवी धाम में घड़ी के अलावा घंटी और ताला बांधने की भी परंपरा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि घंटी और ताला बांधने से जीवन की बाधाएं और परेशानियां दूर होती हैं। वहीं, लाल कपड़े में नारियल बांधकर लोग अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं, जबकि पीले कपड़े में नारियल बांधने की परंपरा नकारात्मक प्रभावों और बुरी शक्तियों से रक्षा की कामना से जुड़ी मानी जाती है।
6 साल पहले हुई थी वर्तमान प्रतिमा की स्थापना
मां मातंगी धाम लंबे समय से क्षेत्र की आस्था का केंद्र रहा है। हालांकि, मंदिर में मां मातंगी की वर्तमान प्रतिमा की स्थापना लगभग 6 साल पहले की गई थी। इसके बाद से यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है और अब यह मंदिर धार्मिक पर्यटन के प्रमुख स्थलों में भी शामिल होने लगा है।
बेमेतरा से मां मातंगी धाम पहुंचीं श्रद्धालु रानी साहू ने बताया कि उनका परिवार लंबे समय से कई परेशानियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों से इस मंदिर की विशेष मान्यताओं के बारे में सुनने के बाद वे माता के दरबार में आशीर्वाद लेने आई हैं।
श्रद्धालु बोले- मनोकामनाएं पूरी होती हैं
रानी के अनुसार, यहां घड़ी, घंटी और ताला बांधने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी विश्वास के साथ उन्होंने भी मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर अपनी मन्नत मांगी है।
वहीं, कवर्धा से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि उन्होंने कई लोगों से मां मातंगी धाम की महिमा सुनी थी। विशेष रूप से घड़ी बांधने की परंपरा के बारे में जानने के बाद उनकी इच्छा यहां आने की हुई। श्रद्धापूर्वक घड़ी बांधने पर जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
इसी आस्था और उम्मीद के साथ वे पहली बार मां के दरबार में पहुंचे हैं।