छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में PGBT कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल के फर्जी हस्ताक्षर और सील का इस्तेमाल कर 5 प्राध्यापकों के तबादले का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों ने फर्जी तबादला प्रस्ताव तैयार कर उसे स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्रालय और संचालक को भेज दिया। इसी प्रस्ताव के आधार पर कॉलेज के 5 प्राध्यापकों का दूसरी जगह तबादला कर दिया गया।
मामले की जानकारी मिलने के बाद रिटायर्ड प्रिंसिपल ने पुलिस में शिकायत की। प्राथमिक जांच के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। मामला तारबाहर थाना क्षेत्र का है।
अब जानिए पूरा मामला
दरअसल, कॉलेज प्रबंधन के प्रस्ताव के आधार पर सहायक प्राध्यापक नूर मोहम्मद रिज्वी, व्याख्याता करीम खान, डॉ. सलीम जावेद और विद्याभूषण शर्मा समेत 5 शिक्षकों का तबादला किया गया था।
तबादले के बाद रिटायर्ड प्राचार्य मीता मुखर्जी को पता चला कि उनके हस्ताक्षर और कॉलेज की सील का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए हैं। इसके बाद उन्होंने फर्जीवाड़े की आशंका जताते हुए एसएसपी से शिकायत की और मामले की जांच कराने की मांग की।
एसएसपी ने दिए जांच के निर्देश, फर्जी मिले दस्तावेज
एसएसपी रजनेश सिंह ने मामले की जांच तारबाहर थाना प्रभारी को सौंप दी। जांच के दौरान पूर्व प्राचार्य मीता मुखर्जी, गवाह सोहित कुमार पटेल, अमर कुमार मलिक, माया दत्ता और कार्यालय स्टाफ सुखनंदन लाल साहू से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए गए।
जांच में संस्थान से जब्त किए गए मूल दस्तावेज और सील का मिलान किया गया। जांच के दौरान दस्तावेजों में किए गए हस्ताक्षर फर्जी पाए गए।
आदेश में 3 बड़ी खामियां, ऐसे खुला फर्जीवाड़ा
जारी आदेश क्रमांक 617 पर 13 नवंबर 2025 की तारीख दर्ज है, लेकिन इसमें शैक्षणिक सत्र 2025-26 की जगह 2026-27 लिखा गया था।
छात्राओं ने कॉमन रूम का दरवाजा बदलवाने के लिए आवेदन दिया था। आरोप है कि इस आवेदन की हस्ताक्षर सूची में काट-छांट कर संचालक एससीईआरटी के नाम से फर्जी छात्र संघ का लेटरपैड तैयार किया गया और उसे शिकायत के साथ लगा दिया गया।
इसके अलावा संस्था की सील पर तत्कालीन प्राचार्य मीता मुखर्जी के फर्जी हस्ताक्षर किए गए। मीता मुखर्जी ने इन हस्ताक्षरों को अपना होने से साफ इनकार किया है।
संलिप्त कर्मचारियों की पहचान कर होगी गिरफ्तारी
टीआई रवि तिवारी ने बताया कि शिकायत की जांच में मामला सही पाए जाने पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 336(3), 336(4) (दस्तावेजों की कूटरचना) और 340 (कूटरचित दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत केस दर्ज किया है। मामले में संलिप्त कर्मचारियों की पहचान कर आगे कार्रवाई की जाएगी।