छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में ग्राम सभा का एक प्रस्ताव चर्चा में है

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में ग्राम सभा का एक प्रस्ताव चर्चा में है। ग्राम सभा ने ईसाई और धर्मांतरित व्यक्तियों को शव दफनाने के लिए गांव में जमीन नहीं देने का फैसला किया है। इसके साथ ही चर्च निर्माण, प्रार्थना सभा और अन्य चर्च संबंधी गतिविधियों के लिए भी जमीन नहीं देने का प्रस्ताव पारित किया गया है।

वहीं, ग्राम पंचायत के सूचना पटल पर भी निर्णय का जिक्र किया गया है। इसमें पादरी और ईसाई धर्म प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर रोक की बात कही गई है। धर्मांतरण, प्रार्थना सभा और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए प्रवेश वर्जित किए जाने का जिक्र है।

इस मामले में जनपद सदस्य मड़कम भीमा ने कहा कि यह निर्णय पारंपरिक व्यवस्था, सामाजिक एकता और सामुदायिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है। पेसा कानून का भी हवाला दिया गया है। यह मामला पोलमपल्ली थाना क्षेत्र के पुनपल्ली ग्राम पंचायत का है।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, 2 अक्टूबर को पुनपल्ली में ग्राम सभा आयोजित की गई थी, जिसमें प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव में कहा गया है कि ईसाई और धर्मांतरित व्यक्तियों को शव दफनाने, चर्च निर्माण, प्रार्थना सभा और अन्य चर्च संबंधी गतिविधियों के लिए ग्राम सभा की भूमि उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

ग्राम सभा ने अपने निर्णय के आधार के रूप में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 और छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 का हवाला दिया है।

सूचना पटल पर धर्म प्रचार को लेकर भी फैसला

ग्राम पंचायत ने ग्राम सभा के निर्णयों को सार्वजनिक करने के लिए पंचायत भवन में सूचना पटल लगाया है। इसमें पादरी और ईसाई धर्म प्रचारकों की ओर से धर्मांतरण, प्रार्थना सभा और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए गांव में प्रवेश को वर्जित किए जाने का जिक्र है।

ग्राम सभा ने इन निर्णयों के पीछे गांव की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक विरासत के संरक्षण को आधार बताया है।