दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल में ट्रेनों की लेटलतीफी रोकने के लिए शुरू की गई हाईटेक लाइव मॉनिटरिंग व्यवस्था के बावजूद यात्रियों को राहत नहीं मिल रही है

Chhattisgarh Crimesदक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल में ट्रेनों की लेटलतीफी रोकने के लिए शुरू की गई हाईटेक लाइव मॉनिटरिंग व्यवस्था के बावजूद यात्रियों को राहत नहीं मिल रही है।

4 सितंबर से मंडल के 47 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यह व्यवस्था लागू की गई थी। इसका उद्देश्य ट्रेनों की लोकेशन पर लगातार नजर रखकर परिचालन में सुधार करना था। लेकिन कई प्रमुख रेल डिवीजन में ट्रेनें अब भी घंटों देरी से चल रही हैं। शुरुआती पड़ताल में बिलासपुर-चांपा, चांपा-रायगढ़ और बिलासपुर-अनूपपुर रेलखंडों में सबसे ज्यादा देरी सामने आई है।

रेलवे के व्यस्त रेलखंडों में मालगाड़ियों का दबाव और विकास कार्यों के चलते यात्री ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ रहा है। सिग्नलिंग की समस्या, बार-बार ट्रैफिक ब्लॉक और दूसरी ट्रेनों को रास्ता देने के कारण परिचालन प्रभावित हो रहा है। एक ट्रेन के लेट होने से उसके पीछे चल रही दूसरी ट्रेनें भी प्रभावित होती हैं।

एक्सप्रेस और मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने के दौरान लोकल और मेमू ट्रेनों को छोटे स्टेशनों की लूप लाइन पर रोकना पड़ता है। लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम से ट्रेनों की लोकेशन नियंत्रण कक्ष में दिखाई दे रही है, लेकिन इससे ट्रेनों की देरी अपने आप दूर नहीं हो रही। बिलासपुर स्टेशन पर भी यात्रियों को ट्रेन के आगमन का सही समय जानने में परेशानी हो रही है। डिस्प्ले बोर्ड पर संभावित समय बार-बार बदलने से यात्री असमंजस में रहते हैं।

इस तरह परेशान हो रहे यात्री : उत्कल एक्सप्रेस के लिए डेढ़ घंटे इंतजार

यात्री सुनीता वर्मा ने बताया कि कलिंग उत्कल एक्सप्रेस का निर्धारित आगमन दोपहर 12 बजे था, लेकिन ट्रेन करीब 1:30 बजे पहुंची। इस दौरान डिस्प्ले बोर्ड पर हर 15 मिनट में आगमन का नया संभावित समय दिखाया जा रहा था। यात्रियों को करीब डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा, लेकिन ट्रेन कब पहुंचेगी, इसकी सटीक जानकारी नहीं मिल सकी।

वैनगंगा एक्सप्रेस लेट हुई, छूट गई बस:

यात्री राजेश जायसवाल के मुताबिक, यशवंतपुर-कोरबा वैनगंगा एक्सप्रेस का बिलासपुर पहुंचने का निर्धारित समय सुबह 9:15 बजे था, लेकिन ट्रेन दोपहर 12 बजे पहुंची। करीब पौने तीन घंटे की देरी के कारण उनकी आगे की कनेक्टिंग बस छूट गई। लंबे इंतजार के दौरान पीने के पानी और बैठने की उचित व्यवस्था भी नहीं मिलती।

आउटर पर सिग्नल नहीं मिला, डेढ़ घंटे लेट हुई ट्रेन:

हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे आलोक तिवारी ने बताया कि ट्रेन का निर्धारित आगमन दोपहर 1:50 बजे था, लेकिन यह करीब 3:20 बजे बिलासपुर पहुंची। आउटर पर सिग्नल नहीं मिलने के कारण ट्रेन खड़ी रही। पूछताछ काउंटर पर भी ट्रेन के आगमन को लेकर सटीक जानकारी नहीं मिल सकी।

मेमू को छोटे स्टेशनों पर रोकने से दैनिक यात्री परेशान:

गोंदिया-झारसुगुड़ा मेमू के यात्री अमित महतो ने बताया कि दोपहर 12:30 बजे आने वाली ट्रेन करीब 2 बजे बिलासपुर पहुंची। एक्सप्रेस और मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए मेमू को छोटे स्टेशनों पर 20 से 30 मिनट तक रोक दिया जाता है। इससे रोजाना नौकरी व दूसरे कामों के लिए यात्रा करने वालों को परेशानी होती है।