राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) को कागजी निर्देशों से निकालकर कॉलेजों और कक्षाओं तक प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार ने नई व्यवस्था बनाने की तैयारी की है। अब प्रदेश के हर विश्वविद्यालय में एनईपी सेल बनाया जाएगा। साथ ही एक नोडल अधिकारी और दो विद्यार्थी ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किए जाएंगे। ये विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान, नीति के प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन की निगरानी में भूमिका निभाएंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने गुरुवार को मंत्रालय में हुई समीक्षा बैठक में इसके निर्देश दिए। बैठक में पिछले दो वर्षों के दौरान एनईपी लागू करने में सामने आई व्यावहारिक दिक्कतों पर चर्चा की गई। क्रेडिट सिस्टम और विषय चयन को लेकर शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच भ्रम दूर करने के लिए संभाग और जिला स्तर पर कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
हर विश्वविद्यालय में प्रत्येक सेमेस्टर की शुरुआत में भी विशेष कार्यशालाएं होंगी। इनमें संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों और नोडल अधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। इसी तरह निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, प्राध्यापकों की उपस्थिति और एनईपी के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए विशेष समिति बनाने को कहा गया।
रोजगार से जोड़ने उद्योगों के साथ समन्वय मंत्री वर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है। इसके लिए उद्योगों, औद्योगिक घरानों और सीएसआर के माध्यम से सहयोग लेने पर जोर दिया गया। छठे सेमेस्टर में अनिवार्य इंटर्नशिप के लिए भी उद्योगों और व्यावसायिक संस्थानों के साथ समय रहते समन्वय करने के निर्देश दिए गए।
उच्च शिक्षा में एनईपी-2020 की खास बातें
1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की घोषणा 29 जुलाई 2020 को की गई थी। उच्च शिक्षा में एनईपी लागू करने वाला देश का पहला राज्य कर्नाटक बना, यहां अगस्त 2021 इसे लागू किया गया। इसके बाद कई राज्यों ने इसे अलग-अलग स्तरों पर लागू किया।
2. पुरानी और नई नीति में बड़ा अंतर: पुरानी शिक्षा नीति में स्नातक का निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद डिग्री मिलती थी। जबकि एनईपी में मल्टीपल एंट्री-एग्जिट का प्रावधान है, इसके अनुसार 1 वर्ष की पढ़ाई पूरी करने पर सर्टिफिकेट, 2 पर डिप्लोमा और 3-4 वर्ष पर डिग्री मिलती है।
3. बहुविषयक पढ़ाई: विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न विषयों के अध्ययन का अवसर पा सकते हैं। नीति में कौशल विकास, इंटर्नशिप और रोजगारपरक शिक्षा पर भी जोर दिया गया है।