बिलासपुर में बांग्लादेशी होने के शक में पकड़े गए 23 लोगों में से बाकी 4 को भी रिहा कर दिया गया है। सभी को रायपुर के होल्डिंग सेंटर में रखा गया था। दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें रिहा किया गया। इससे पहले 19 लोगों को रिहा किया जा चुका था। वहीं, पहले पकड़े गए 2 लोगों को बांग्लादेश भेजने की तैयारी चल रही है। सभी 23 लोगों को बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र से पकड़ा गया था। इसके बाद उन्हें रायपुर स्थित होल्डिंग सेंटर भेजा गया था।
मुर्शिदाबाद डीएम की रिपोर्ट के बाद दो चरणों में रिहाई
शुरुआती जांच और संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने 4 सितंबर को 23 लोगों को रायपुर के होल्डिंग सेंटर भेजा था। उनकी पहचान की पुष्टि के लिए पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के कलेक्टर (डीएम) से पत्राचार किया गया। डीएम की ओर से नियुक्त एडीएम ने जांच कर रिपोर्ट भेजी। इसके बाद दो चरणों में सभी को रिहा किया गया। पहली रिपोर्ट मिलने के बाद 17 सितंबर को 19 लोगों को रिहा किया गया था। वहीं, 7 अक्टूबर को बाकी 4 लोगों की रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें भी छोड़ दिया गया। यह पूरी कार्रवाई डिपोर्टेशन मैनुअल 2026 के तय नियमों के तहत की गई है।
ट्रिब्यूनल में लगाई गुहार, तब हरकत में आई पुलिस
बताया जा रहा है कि इन लोगों ने पुलिस के सामने अपने सभी दस्तावेज पेश किए थे। इसके बावजूद उनके दस्तावेजों को मान्य नहीं करते हुए जांच कराई गई और उन्हें बांग्लादेश भेजने की कार्रवाई करने की बात कही गई।
इससे परेशान होकर इन लोगों ने ट्रिब्यूनल में अपील की। इसके बाद पुलिस ने उनके दस्तावेजों का सत्यापन कराया और डिपोर्टेशन मैनुअल के नियमों के तहत उन्हें रिहा कर दिया। हालांकि, ट्रिब्यूनल में उनकी अपील अभी विचाराधीन है।
अतीक हुसैन के निर्वासन की कार्रवाई जारी
मामले में अतीक हुसैन और हृदय शर्मा को बांग्लादेश भेजने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अतीक हुसैन लंबे समय से बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र में रहकर एनटीपीसी में काम कर रहा था।
संदिग्धों की धरपकड़ शुरू होने के बाद उसके सरकंडा क्षेत्र में किराए के मकान में रहने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इसके बाद निरीक्षक संजय शिंदे की टीम ने उसे गिरफ्तार कर रायपुर के होल्डिंग सेंटर भेजा था। अब उसके निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।