■ 1 नवंबर 2000 को अस्तित्व में आया छत्तीसगढ़ आज विकास की नई संभावनाओं की ओर अग्रसर; 26 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और सड़क सुविधाओं का विस्तार, नक्सलवाद के खिलाफ लंबा संघर्ष भी रहा ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा।
युमेन्द्र कश्यप/छत्तीसगढ़ क्राइम्स। छत्तीसगढ़ के इतिहास में 1 नवंबर 2000 का दिन स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज है। लंबे संघर्ष और अलग राज्य की मांग के बाद मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ देश के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। अजीत जोगी प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने और रायपुर को राजधानी बनाया गया।
आज 1 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ अपने गठन के 26 वर्ष पूरे कर रहा है। इन वर्षों में प्रदेश ने कई उतार-चढ़ाव देखे और विकास के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई।
प्रशासन से लेकर विकास तक बदली तस्वीर
राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में 16 जिले थे, जो अब बढ़कर 33 हो चुके हैं। प्रशासनिक विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और संचार सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है।
कृषि प्रधान राज्य होने के कारण किसानों के लिए धान खरीदी, सिंचाई परियोजनाओं और कृषि सहायता योजनाओं का विस्तार किया गया। वहीं कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ीं। प्रदेश आज देश के प्रमुख खनिज और ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल है।
शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों, इंजीनियरिंग संस्थानों और स्कूलों की संख्या बढ़ी। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास हुआ। सड़क, रेलवे और हवाई कनेक्टिविटी में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आगे बढ़ीं।
नक्सलवाद से संघर्ष और ऐतिहासिक बदलाव
छत्तीसगढ़ की 26 वर्षों की यात्रा में नक्सलवाद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रहा। विशेषकर बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर जैसे क्षेत्रों में नक्सली हिंसा ने विकास की गति को प्रभावित किया।
सुरक्षाबलों के अभियान, आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति और विकास योजनाओं के माध्यम से इस समस्या से निपटने के लगातार प्रयास किए गए।
31 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद यानी वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के लक्ष्य की प्राप्ति की घोषणा की। नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या शून्य होने को देश की आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।
इस बदलाव से बस्तर सहित प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि स्थायी शांति, पुनर्वास और प्रभावित परिवारों का विश्वास जीतना अभी भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
आदिवासी संस्कृति और पर्यटन की नई संभावनाएं
छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी आदिवासी संस्कृति, लोककला, परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता से भी है। बस्तर दशहरा, चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, सिरपुर, मैनपाट और उदंती-सीतानदी जैसे पर्यटन स्थल प्रदेश की पहचान को मजबूत करते हैं।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति की स्थिति बेहतर होने से पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने की नई संभावनाएं बनी हैं। गरियाबंद जिले के वनांचलों और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में भी विकास की अपार संभावनाएं हैं।
विकास के साथ चुनौतियां भी बरकरार
26 वर्षों में प्रदेश ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन कुपोषण, बेरोजगारी, किसानों की आय, ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं।
खनन और औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, विस्थापित परिवारों का पुनर्वास और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा भी जरूरी है।
नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ता छत्तीसगढ़
आज छत्तीसगढ़ अपने 26 वर्षों के सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ा है। राज्य गठन से लेकर अब तक प्रदेश ने प्रशासनिक विस्तार, कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है।
नक्सलवाद की चुनौती से निकलने के बाद अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी बस्तर और अन्य वनांचलों में स्थायी शांति स्थापित करने के साथ विकास की रोशनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की है।
छत्तीसगढ़ की 26 वर्षों की यात्रा केवल एक राज्य के गठन की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, पहचान, विकास और उम्मीदों की कहानी है। अब आवश्यकता है कि विकास का लाभ प्रदेश के हर गांव, हर परिवार और हर नागरिक तक पहुंचे।
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।