छत्तीसगढ़ में बढ़ते गर्मी के कारण स्कूलों के समय में बदलाव किया गया

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ में बढ़ते गर्मी के कारण स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। आज से कक्षाएं सुबह 7 बजे से 11 बजे तक लगेंगी। वहीं 23 जून से क्लासेस सामान्य दिनों की तरह संचालित होंगी। बता दें कि प्रदेश में आज से समर वेकेशन खत्म हो गए हैं। स्कूल खुल चुके हैं। रायपुर के जेएन पांडे स्कूल में शाला प्रवेश उत्सव मनाया गया।

टीचर्स ने बच्चों का स्वागत किया, मिठाई बांटकर प्रवेश कराया। इसी तरह बिलासपुर, जगदलपुर, रायगढ़, दुर्ग भिलाई समेत पूरे प्रदेश में टीचर्स बच्चों का स्वागत कर रहे हैं। रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी विजय खंडेलवाल ने बताया कि 18 जून को ब्लॉक स्तर पर और 20 जून को जिला स्तर पर शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम रखा गया है।

बालोद में लोगों ने स्कूल में जड़ा ताला

शिक्षकों की कमी को लेकर बालोद जिले में शाला प्रवेशोत्सव के पहले दिन ग्राम पंचायत दारुटोला में ग्रामीणों ने शासकीय प्राथमिक स्कूल में तालाबंदी कर दी। ढाई घंटे तक धरना देने के बाद शिक्षक की मांग पूरी होने पर लोगों ने ताला खोला। ग्रामीणों का कहना था कि स्कूल में कक्षा पहली से पांचवीं तक 72 बच्चे अध्ययनरत हैं। लेकिन स्कूल में केवल एक प्रधानपाठक और एक सहायक शिक्षक पदस्थ हैं। शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में वे कई बार शिक्षा विभाग और कलेक्टर जनदर्शन में लिखित आवेदन दे चुके हैं। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। मांग पूरी न होने पर ग्रामीणों ने सोमवार को शाला प्रवेशोत्सव का बहिष्कार करते हुए सुबह 10 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक धरना दिया और स्कूल में ताला जड़ दिया।

मामले की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग हरकत में आया। जिला शिक्षा अधिकारी डी.के. कोसरे ने बताया कि अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें आश्वासन दिया कि जल्द ही एक अतिरिक्त शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी। लिखित में आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने स्कूल का ताला खोल दिया और धरना समाप्त कर दिया।

सरकार का दावा- अब कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं

पिछले कई महीनों से राज्य सरकार युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया कर रही है। इसके बाद अब सरकार की ओर से कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में एक भी स्कूल ऐसा नहीं है जो शिक्षक विहीन हो। राज्य के लगभग 212 प्राथमिक शालाएं और 48 पूर्व माध्यमिक शालाएं इससे पहले शिक्षक विहीन थी। 6872 प्राथमिक शालाएं और 255 पूर्व माध्यमिक शालाएं सिर्फ एक टीचर के भरोसे चल रही थी।

211 स्कूल ऐसे थे जहां छात्रों की संख्या जीरो थी, लेकिन टीचर पदस्थ थे इसके अलावा 166 स्कूलों को मर्ज किया गया है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के 133 स्कूल हैं जिनमें स्टूडेंट की संख्या 10 से कम थी और शहरी क्षेत्र की 33 स्कूल है, जिनकी स्टूडेंट संख्या 30 से कम थी।