छात्रा को 23 साल से सांस लेने में दिक्कत थी, अंबेडकर अस्पताल में सर्जरी से ठीक हुए मरीज

Chhattisgarh Crimesराजधानी की एक युवती को बचपन से ही सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। जब वह सांस लेती थी तो उसके सामने के नथुने अंदर चले जाते थे। सांस बाहर छोड़ने पर भी परेशानी हो रही थी। 23 साल तक वह इस परेशानी से गुजरी। इसके बाद वह अंबेडकर अस्पताल पहुंची। यहां ईएनटी विभागाध्यक्ष हंसा बंजारे की देखरेख में डॉक्टर मान्या ठाकुर व उनकी टीम ने सेप्टोरायनोप्लास्टी कर उसकी नाक को ठीक किया।

डॉक्टरों ने बताया कि उसकी एलर कार्टलेज कमजोर थी। युवती के नाक के अंदर एक कार्टलेज लगाया। इससे नाक की आकार भी ठीक हुई। सर्जरी करीब एक घंटे चली। अगले दिन उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। अब उसे सांस लेने में कोई परेशानी नही‌ं होती। अंबेडकर अस्पताल में ऐसे ही मरीज जिनकी सड़क दुर्घटना में नाक की हड्डी टेढ़ी हो गई।

एक अन्य युवक की क्रिकेट खेलते समय बॉल नाक में लग गई जिससे आकार बिगड़ गया। अंबेडकर अस्पताल में ऐसे मरीजों की सफल सर्जरी हो रही है। सांस लेने में दिक्कत का भी सर्जरी से सफल इलाज किया जा रहा है। प्राइवेट में इस सर्जरी के लिए 80 हजार से डेढ़ लाख तक खर्च आता है। लेकिन अंबेडकर में यह सुविधा आयुष्मान कार्ड से नॉमिनल चार्जेस में मिल रही है। अंबेडकर में अब तक 8-10 मरीजों की सफल सर्जरी हो चुकी है।

कान की हड्डी का इस्तेमाल

सड़क दुर्घटना में एक 40 वर्षीय व्यक्ति की नाक की हड्डी टेढ़ी हो गई थी। उसे सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी। अंबेडकर अस्पताल पहुंचा तो उसकी जांच की गई। फिर कान और नाक की हड्डी का प्रयोग कर उसके नाक के आकार को ठीक किया गया। वह 2 दिन अस्पताल में भर्ती रहा। इसके बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। मरीज अब बिल्कुल ठीक है।
क्या होती है सेप्टोराइनोप्लास्टी : ईएनटी विशेषज्ञ डॉ मान्या ठाकुर ने बताया कि सेप्टोराइनोप्लास्टी नाक का ऑपरेशन होता है। यह नाक के स्वरूप और सांस लेने के तरीके में सुधार करने की एक प्रक्रिया है। इसमें 1 से 2 घंटे का समय लगता है। इस ऑपरेशन से नाक का आकार सुधारा जाता है। नाक को सीधा, संकरा या बड़ा कर सकते हैं। इसमें नाक व कान की हड्डी का प्रयोग किया जाता है।