
जांच में पता चला कि जमीन डीड और परिवार के लोगों को गिफ्ट के नाम पर बांटी गई थी। ED ने 4.69 करोड़ रुपए के शेयर और म्यूचुअल फंड भी अटैच किए हैं। साथ ही जय प्रकाश गांधी समेत 14 आरोपियों के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में पूरक अभियोजन शिकायत ( (सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट)) भी दाखिल की है।
रायपुर जोनल कार्यालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज के अनुसार 31 जुलाई 2026 को ईडी ने प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर क्रमांक-17/2026 जारी किया। जांच में पता चला कि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद कुछ जमीन मालिकों, दलालों और राजस्व अधिकारियों ने आपस में मिलकर साजिश रची।
जांच के अनुसार ज्यादा मुआवजा पाने के लिए जमीनों का कृत्रिम रूप से विभाजन (टुकड़े) किया गया, ताकि नियमों का फायदा उठाकर ज्यादा मुआवजा हासिल किया जा सके।
गिफ्ट डीड के जरिए बढ़ाई गई मुआवजे की पात्रता
ED की जांच में सामने आया कि कई मामलों में बिक्री और गिफ्ट डीड के जरिए जमीन परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम कर दी गई। इसके बाद जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अधिक मुआवजा लेने की पात्रता बनाई गई।
इस तरीके से करोड़ों रुपए का अतिरिक्त मुआवजा हासिल किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, पूरे मामले में राजस्व अधिकारियों और भूमि दलालों की मिलीभगत सामने आई है
EOW-ACB की FIR के आधार पर जांच
ED ने यह जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), छत्तीसगढ़ द्वारा 23 अप्रैल 2025 को दर्ज FIR के आधार पर शुरू की।
यह FIR तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) और सक्षम भूमि अधिग्रहण अधिकारी (CALA) अभनपुर, निरभय साहू सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई थी। बाद में विशेष न्यायालय, रायपुर में इस मामले का आरोप पत्र भी पेश किया गया।