कभी कुख्यात नक्सली कमांडर हिड़मा और देवा जैसे नक्सल नेताओं के गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले बस्तर के अंदरूनी इलाकों में अब तिरंगा शान से लहराएगा

Chhattisgarh Crimesकभी कुख्यात नक्सली कमांडर हिड़मा और देवा जैसे नक्सल नेताओं के गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले बस्तर के अंदरूनी इलाकों में अब तिरंगा शान से लहराएगा। जिन रास्तों पर कभी नक्सलियों का प्रभाव और गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, उन्हीं इलाकों से पहली बार ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ निकाली जा रही है।

तीन दिवसीय इस यात्रा की शुरुआत 12 अगस्त को नारायणपुर से होगी। डिप्टी सीएम विजय शर्मा खुद बाइक चलाकर यात्रा का नेतृत्व करेंगे। उनके साथ बड़ी संख्या में बाइक राइडर और महिला बाइकर्स तिरंगा लेकर शामिल होंगी। यात्रा दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरेगी।

इसमें बुरकापाल, मिनपा-ताड़मेटला, जगरगुंडा, सिलगेर और टेकलगुड़ेम जैसे इलाके शामिल हैं। यात्रा के दौरान नक्सली हिंसा में शहीद जवानों और आम लोगों को याद किया जाएगा। घटनास्थलों की मिट्टी ली जाएगी। शहीदों की याद में पौधे लगाए जाएंगे और श्रद्धांजलि दी जाएगी। 14 अगस्त को कुर्रेगुट्टा पहाड़ी पर तिरंगा फहराने के साथ यात्रा का समापन होगा।

शहीदों की याद में घटनास्थलों से मिट्टी जुटाई जाएगी

यात्रा के दौरान उन जगहों की मिट्टी भी श्रद्धा के साथ जमा की जाएगी, जहां नक्सली हमलों में बड़ी संख्या में जवान शहीद हुए थे। संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की मिट्टी भी इकट्ठा की जाएगी। इसे भविष्य में शहीदों की याद में बनाए जाने वाले संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा।

यह यात्रा सिर्फ तिरंगा लेकर निकलने वाली बाइक रैली नहीं होगी, बल्कि शहीद जवानों की यादों को सहेजने का भी अभियान होगी। इन जवानों ने बस्तर में शांति और लोकतंत्र के लिए अपनी जान कुर्बान की।

यात्रा बुरकापाल, मिनपा, टेकलगुडेम और सिलगेर जैसे इलाकों से होकर गुजरेगी। इन क्षेत्रों को कभी नक्सली गतिविधियों के कारण बेहद संवेदनशील माना जाता था। अब इन्हीं रास्तों पर बाइकर्स तिरंगा लेकर पहुंचेंगे और ग्रामीणों को देशभक्ति, शांति, सुरक्षा और लोकतंत्र का संदेश देंगे।

महिला बाइकर्स भी होंगी शामिल

बस्तर तिरंगा यात्रा में महिला बाइकर्स की भागीदारी खास आकर्षण होगी। अलग-अलग जिलों से आने वाली महिला राइडर हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा में शामिल होंगी। उनके साथ स्थानीय युवा, स्वयंसेवी संगठन, महिला समूह, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, स्काउट-गाइड और जनप्रतिनिधि भी यात्रा का हिस्सा बनेंगे।

यह सिर्फ बाइक रैली नहीं होगी, बल्कि बस्तर के उन इलाकों तक पहुंचने की कोशिश होगी, जहां लंबे समय तक हिंसा और भय का माहौल रहा। तिरंगे के साथ इन क्षेत्रों में पहुंचकर यह संदेश दिया जाएगा कि अब यहां के युवा देश की मुख्यधारा के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहे हैं।

जहां कभी नक्सली हमले हुए, वहां शहीदों को नमन

यात्रा के दौरान उन स्थानों पर भी बाइकर्स रुकेंगे, जहां बड़े नक्सली हमले हुए और जवानों एवं नागरिकों ने अपनी जान गंवाई। नारायणपुर के मुंजमेटा, झारागांव, धौड़ाई और कन्हारगांव सहित अन्य स्थानों पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान के तहत इन स्थानों पर पौधारोपण भी किया जाएगा। यानी जिन जगहों ने कभी हिंसा और खून के निशान देखे, वहीं अब तिरंगा और शांति का संदेश दिखाई देगा।

शहीदों की मिट्टी सहेजकर बनेगी स्मृति

इस यात्रा में शहीद स्थलों की मिट्टी जमा करना सबसे भावुक पहल होगी। जहां जवानों और नागरिकों ने अपनी जान दी, वहां की मिट्टी सम्मान के साथ जुटाई जाएगी। बड़ी नक्सली घटनाओं में शहीद हुए जवानों से जुड़े इलाकों और विधानसभा क्षेत्रों की मिट्टी भी जमा की जाएगी।

इसे भविष्य में शहीदों की याद में बनाए जाने वाले संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा। इसका मकसद आने वाली पीढ़ियों को बताना है कि बस्तर में शांति और लोकतंत्र हासिल करना आसान नहीं रहा। इसके पीछे कई जवानों और नागरिकों का बलिदान जुड़ा है।

Exit mobile version