
लगातार बढ़ते बिजली बिल और स्मार्ट मीटर की रीडिंग को लेकर उपभोक्ताओं में भी असंतोष बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि शहर में रोजाना करीब 20 से 25 उपभोक्ता अधिक बिल आने की शिकायत लेकर बिजली विभाग के कार्यालय पहुंच रहे हैं। कांग्रेसियों का आरोप है कि शिकायतों का मौके पर समाधान करने के बजाय कई बार मोबाइल में दिखाई जा रही यूनिट की जानकारी देखकर ही उपभोक्ताओं को वापस भेज दिया जाता है।
कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर के खिलाफ विरोध तेज कर दिया है। प्रदेश और जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन के बाद अब कांग्रेस ने घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर के खिलाफ अभियान शुरू किया है। इसके लिए पार्टी ने बाकायदा एक फॉर्म तैयार किया है, जिसमें स्मार्ट मीटर लगने से पहले और बाद के बिजली बिल की जानकारी जुटाई जा रही है। कांग्रेस का दावा है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई घरों में बिजली बिल बढ़ गया है।
20-25 शिकायतें रोज पहुंचने का दावा
शहर में स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिल की शिकायतों को लेकर रोजाना करीब 20 से 25 उपभोक्ताओं के बिजली विभाग के कार्यालय पहुंचने की बात सामने आ रही है।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में मोबाइल पर दिखाई दे रही यूनिट की जानकारी देखकर ही उन्हें वापस भेज दिया जाता है। मीटर की जांच का आश्वासन मिलने के बाद भी जांच रिपोर्ट की जानकारी समय पर नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर सरकार और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं होने से स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों का अविश्वास बढ़ रहा है।
स्मार्ट मीटर से बढ़ा बिजली बिल
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मई-जून की गर्मी में बिजली की खपत बढ़ना स्वाभाविक था, लेकिन बारिश के मौसम में खपत कम होने के बावजूद कई उपभोक्ताओं के बिल अधिक आ रहे हैं। पार्टी इसी मुद्दे को आधार बनाकर स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है।