
दरअसल, आय से अधिक संपत्ति की शिकायत के बाद छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने तत्कालीन DEO सुभाष गंजीर से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान 8.71 लाख रुपए कैश, करीब 500 ग्राम सोना-आभूषण और बड़ी संख्या में संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए थे। जांच एजेंसी को करीब 40 संपत्तियों और तीन मकानों से जुड़े दस्तावेज भी मिले थे।
जानिए कब हुई थी कार्रवाई
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में केस जांच के बाद ACB ने सुभाष गंजीर को 26 मई 2018 को गिरफ्तार किया था। उन्हें 5 जुलाई 2018 को जमानत मिली। मामले में 21 जून 2018 को चार्जशीट पेश की गई और 23 जुलाई 2018 को आरोप तय किए गए। कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार अभियुक्त पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ई) सहपठित धारा 13(2) के तहत मामला चला।
आय से 88.30% अधिक संपत्ति का मामला
अदालत के फैसले में सुभाष गंजीर को उनकी आय की तुलना में 88.30 प्रतिशत अधिक संपत्ति रखने के मामले में दोषी माना गया है। कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों, पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषसिद्धि किया। इसके बाद 31 अगस्त 2026 को 4 साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड नहीं देने पर 6 महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष ने की पैरवी
मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से पेश साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अपना पक्ष रखा। अभियोजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ममता शर्मा ने पैरवी की। कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद सुभाष गंजीर को दोषी करार देते हुए सजा का आदेश जारी किया।