भिलाई में शेयर ट्रेडिंग और गोल्ड लोन कारोबार के नाम पर करीब 15 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया

Chhattisgarh Crimesभिलाई में शेयर ट्रेडिंग और गोल्ड लोन कारोबार के नाम पर करीब 15 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। छावनी पुलिस ने इस मामले में यतेंद्र सिंह डहरिया उर्फ शिबू (33) को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने शिकायतकर्ता अभिषेक जैन की पत्नी निकिता जैन के नाम पर डीमैट खाता खुलवाकर उसमें शेयर जमा करने का भरोसा दिया था। बाद में रकम लेने और कथित फर्जी दस्तावेज देने की शिकायत पर अपराध दर्ज किया गया। आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

अभिषेक जैन ने पुलिस को बताया कि वह यतेंद्र सिंह डहरिया को करीब 10 साल से जानता है। यतेंद्र खुद को शेयर मार्केटिंग और गोल्ड लोन का कारोबारी बताता था। वह यूनिक इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंशियल सर्विसेज और एन वाई इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के नाम से कारोबार करने की बात कहता था।

शिकायत के मुताबिक, मार्च 2024 में यतेंद्र के कहने पर अभिषेक ने अपनी पत्नी के बैंक खाते से उसे 13 लाख रुपए दिए। इसके अलावा 2.50 लाख रुपए उनके पिता अशोक जैन के जरिए दिए गए। आरोप है कि यह रकम शेयर बाजार में निवेश करने और सुरक्षित रखने के नाम पर ली गई थी।

खुद को मोतीलाल ओसवाल का एजेंट बताने का आरोप

अभिषेक के अनुसार, यतेंद्र ने खुद को मोतीलाल ओसवाल का सब-ब्रोकर या एजेंट बताया था। उसने निकिता जैन के नाम पर डीमैट खाता खुलवाकर उसी के जरिए शेयर ट्रेडिंग करने का भरोसा दिया।शिकायतकर्ता का कहना है कि मार्च 2026 में जांच करने पर पता चला कि यतेंद्र उक्त कंपनी का मान्यता प्राप्त सब-ब्रोकर या एजेंट नहीं था।

18 लाख लौटाने का भरोसा, फिर शेयर ट्रांसफर का दावा

शिकायत के अनुसार, बातचीत के दौरान यतेंद्र ने एकमुश्त 18 लाख रुपए लौटाने का भरोसा दिया। बाद में उसने दावा किया कि अभिषेक और उनके पिता की रकम से खरीदे गए शेयर उसके डीमैट खाते में हैं। 8 अप्रैल 2026 को उसने कथित तौर पर बताया कि डीमैट खाता निष्क्रिय होने के कारण शेयर अभिषेक की पत्नी के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए हैं।

CDSL की रसीद और दस्तावेज देने का आरोप

शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसके समर्थन में यतेंद्र ने CDSL के नाम से शेयर ट्रांसफर की रसीद और अन्य दस्तावेज दिए। अभिषेक का आरोप है कि बाद में जांच कराने पर ये दस्तावेज फर्जी निकले।उन्होंने जेरोधा और CDSL से संपर्क किया, जहां कथित तौर पर किसी शेयर ट्रांसफर की पुष्टि नहीं हुई।

15 लाख के दो चेक, खाता पहले ही बंद कराने का आरोप

अभिषेक ने बताया कि लगातार रकम मांगने के बाद मई 2026 के अंतिम सप्ताह में यतेंद्र ने 3 लाख रुपए वापस किए। इसके बाद 1 जून को 15 लाख रुपए के दो चेक दिए गए। इनमें 10 लाख रुपए का चेक 4 जून और 5 लाख रुपए का चेक 11 जून की तारीख का था।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि यतेंद्र ने 2 जून को ही संबंधित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का खाता बंद करा दिया। इसके कारण दोनों चेक अनादरित हो गए।

अभिषेक के मुताबिक, 10 जून को हुई अंतिम बातचीत में 11 जून को पूरा पैसा देने की बात कही गई थी, लेकिन अगले दिन यतेंद्र का मोबाइल बंद मिला। घर और कार्यालय पर ताला लगा था। बाद में उसके भिलाई से चले जाने की जानकारी मिली।

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