
मितानिनें सुबह से ही रणजीता स्टेडियम पहुंचने लगी थीं। दोपहर करीब 2 बजे सभी कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं और ज्ञापन सौंपा। इसके बाद मितानिनों का समूह सीएमएचओ कार्यालय पहुंचा, जहां उन्होंने दस्तावेज लिए जाने और अपनी कार्य व्यवस्था को लेकर उठे सवालों पर अधिकारियों से जानकारी मांगी।
आधार कार्ड समेत दस्तावेज लिए जाने से बनी आशंका
मितानिनों ने ज्ञापन में बताया कि कुछ दिन पहले आयुष्मान कार्ड बनाने के नाम पर उनके और परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड समेत जरूरी दस्तावेज लिए गए थे। उनका कहना है कि दस्तावेज लेने की प्रक्रिया के बारे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से पहले स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।
जब उन्होंने दस्तावेज लेने वाली संस्था से इसका उद्देश्य पूछा, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद मितानिनों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि कहीं उन्हें एनएचएम से हटाकर किसी ठेका कंपनी के अधीन तो नहीं किया जा रहा है।
मितानिन बोलीं- ठेका कंपनी के अधीन काम करने को तैयार नहीं
सारूडीह की मितानिन निरमंती बाई ने बताया कि जानकारी मांगने के बाद भी स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से उनके मन में आशंका पैदा हुई। उन्होंने कहा कि मितानिनें ठेका कंपनी के अधीन काम करने के लिए तैयार नहीं हैं।
उन्होंने बताया कि इसी वजह से जिलेभर की मितानिनें अपनी स्थिति स्पष्ट कराने और अधिकारियों का ध्यान इस ओर दिलाने जिला मुख्यालय पहुंचीं।
सीएमएचओ बोले- मितानिनों को हटाने की बात गलत
मितानिनों की आशंका पर सीएमएचओ डॉ. जी.एस. जात्रा ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मितानिनों को हटाने या उन्हें किसी ठेका कंपनी के अधीन किए जाने की बात पूरी तरह गलत है।
सीएमएचओ के मुताबिक, मितानिनों के परिवार के सदस्यों को भी आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि परिवार के अन्य सदस्यों को भी योजना के तहत स्वास्थ्य संबंधी लाभ मिल सके।
परिवार का डाटा जुटाने के लिए ली गई जानकारी
डॉ. जात्रा ने बताया कि इसी उद्देश्य से मितानिनों के परिवार के सदस्यों से संबंधित डाटा अलग से एकत्र किया गया है। इसके लिए गूगल के माध्यम से डाटा जुटाने की प्रक्रिया की गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस डाटा संग्रह का मितानिनों की कार्य व्यवस्था में किसी बदलाव से कोई संबंध नहीं है। उन्हें एनएचएम से हटाने या किसी अन्य व्यवस्था के तहत काम कराने जैसी कोई बात नहीं है।
अधिकारियों ने समझाकर दूर की शंकाएं
सीएमएचओ ने बताया कि दस्तावेज लिए जाने को लेकर मितानिनों के बीच जो आशंका बनी थी, उसे अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है। उन्हें पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई और बताया गया कि परिवार के सदस्यों को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाने के लिए डाटा जुटाया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, मितानिनों की शंकाओं का समाधान किया गया, जिसके बाद उन्हें संतुष्ट कर वापस भेज दिया गया।