छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला अस्पताल में सोमवार को 8 माह की गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ के कोरबा जिला अस्पताल में सोमवार को 8 माह की गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि महिला को 3 दिन तक सामान्य प्रसव का इंतजार कराया गया। सिजेरियन और सोनोग्राफी की मांग भी नहीं मानी गई। साथ ही, समय पर हायर सेंटर रेफर नहीं किया गया।

परिजनों ने सीएचसी और मेडिकल कॉलेज में रात के समय डॉक्टरों के नहीं मिलने का भी आरोप लगाया है। मामले की जांच के लिए टीम बनाई गई है। मेडिकल कॉलेज के डॉ. आदित्य सिसोदिया को जांच अधिकारी बनाया गया है।

डॉ. आदित्य सिसोदिया ने परिजनों के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि मरीज को तीनों दिन उचित इलाज और देखभाल दी गई। डॉक्टरों ने नियमित रूप से राउंड भी लिया।

डॉ. आदित्य के मुताबिक, महिला को लेबर रूम में शिफ्ट करने के समय बच्चे की धड़कन नहीं थी। ऐसे में सिजेरियन करने का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने बताया कि महिला की मौत अचानक घबराहट और पल्पिटेशन के बाद हुई। मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

महिला ने किया था लव मैरिज

जानकारी के मुताबिक दीपका बस्ती में रहने वाला ओंकारेश्वर रजक ने नंवबर 2025 में कविता से लव मैरिज की थी। 24 सितंबर को कविता को लेबर पेन होने पर परिवार वाले मिनीमाता शांतिनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर पहुंचे थे। वहां उस समय केवल महिला स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थी।

3 दिनों तक सामान्य प्रसव का इंतजार

25 सितंबर को एनीमिया की स्थिति को देखते हुए कविता को मेडिकल कॉलेज से जुड़े जिला अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल में तीन दिन तक सामान्य प्रसव का इंतजार कराया गया। उन्होंने सोनोग्राफी और सर्जरी से प्रसव कराने की मांग की, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।

लेबर रूम में बढ़ी सांसें और कुछ देर बाद मौत

उनका कहना है कि न तो कविता को बड़े अस्पताल रेफर किया गया और न ही सिजेरियन किया गया। सोमवार तड़के कविता की प्रसव पीड़ा बढ़ गई। इसके बाद उसे लेबर रूम ले जाया गया। वहां उसकी सांसें तेज हो गईं और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।

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