
केंद्र सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 भी लागू किए हैं। नए नियमों के तहत घरों और संस्थानों में कचरा अलग-अलग रखना जरूरी होगा। कचरे को गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा अलग करना होगा।
आयुक्त के मुताबिक, रायपुर को 4 क्लस्टर में बांटा जाएगा। इन क्लस्टरों में करीब 5 हजार बीट बनाए जाएंगे। कचरा संग्रहण और इससे जुड़े काम की निगरानी इसी व्यवस्था के तहत होगी।
काम करने वाली एजेंसियों को भुगतान उनके काम के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। यानी सिर्फ कचरा उठाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि काम कितना और किस तरह हुआ, इसे भी देखा जाएगा।
सेंट्रल कंट्रोल सेंटर से पूरे शहर की निगरानी
कचरा प्रबंधन की निगरानी के लिए सेंट्रल कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा। यहां से कचरा उठाने, अलग करने, ले जाने और आगे के प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्था पर नजर रखी जाएगी। केंद्र के नए नियमों में भी कचरा पैदा होने से लेकर उसके संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान तक की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने की व्यवस्था की गई है।
बड़े संस्थानों को खुद संभालना होगा अपना कचरा
नए नियमों में ज्यादा कचरा पैदा करने वाले संस्थानों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। 20 हजार वर्गमीटर या उससे ज्यादा क्षेत्रफल, रोज 40 हजार लीटर या उससे ज्यादा पानी की खपत या 100 किलो या उससे ज्यादा कचरा रोज पैदा करने वाली जगहों को बल्क वेस्ट जनरेटर माना जाएगा।
इसमें सरकारी विभाग, संस्थान, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान और आवासीय समितियां भी आ सकती हैं। इन्हें अपने कचरे के संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। जहां संभव होगा, ऐसे संस्थानों को गीले कचरे का निपटारा अपने परिसर में ही करना होगा।
कचरा कहां से उठा और कहां गया, ऑनलाइन रिकॉर्ड रहेगा
नए नियमों के तहत कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा। इससे यह देखा जा सकेगा कि कचरा कहां पैदा हुआ, कब उठा, कहां ले जाया गया और उसका क्या हुआ। कचरा प्रसंस्करण केंद्रों का ऑडिट भी जरूरी होगा और उसकी रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर डालनी होगी।
नियम तोड़े तो देना पड़ सकता है मुआवजा
कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन नहीं करने पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जा सकता है। बिना पंजीकरण काम करना, गलत जानकारी देना या फर्जी दस्तावेज देना भी इसके दायरे में आएगा।
पुराने कचरे के पहाड़ भी हटाने होंगे
पुराने कचरा स्थलों की पहचान और उनका आकलन करना होगा। इन जगहों पर समयबद्ध तरीके से बायोमाइनिंग और बायोरिमेडिएशन किया जाएगा। लैंडफिल में हर तरह का कचरा नहीं भेजा जा सकेगा। नए नियमों के तहत वहां केवल ऐसा कचरा जाएगा जिसे न तो रिसाइकिल किया जा सकता है और न ही उससे ऊर्जा हासिल की जा सकती है।
उद्योगों में कचरे से बने ईंधन का इस्तेमाल बढ़ेगा
सीमेंट प्लांट और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट जैसे उद्योगों में कचरे से तैयार ईंधन RDF का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। इसके लिए ईंधन बदलने की दर को अगले छह साल में 5% से बढ़ाकर 15% करने का लक्ष्य रखा गया है।
कंट्रोल सेंटर से होगी निगरानी
रायपुर में नई व्यवस्था के तहत कचरा संग्रहण, अलग-अलग करना, परिवहन और निपटान को एक साथ मॉनिटर किया जाएगा। 4 क्लस्टर, 5 हजार बीट और सेंट्रल कंट्रोल सेंटर के जरिए व्यवस्था पर नजर रखी जाएगी। नए नियमों का असर सीधे घरों से निकलने वाले कचरे पर भी पड़ेगा। इसलिए अब सिर्फ कचरा बाहर देना ही नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से अलग करके देना भी जरूरी होगा।