महंगे कोचिंग संस्थानों की भारी-भरकम फीस और आर्थिक तंगी अब सरकारी स्कूलों के मेधावी बच्चों की उड़ान में बाधा नहीं बनेगी

Chhattisgarh Crimesमहंगे कोचिंग संस्थानों की भारी-भरकम फीस और आर्थिक तंगी अब सरकारी स्कूलों के मेधावी बच्चों की उड़ान में बाधा नहीं बनेगी। आनंद कुमार के चर्चित ‘सुपर 30’ की तर्ज पर दुर्ग जिले में ‘सुपर 80’ की शुरुआत हो चुकी है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की इस महत्वाकांक्षी परिकल्पना के तहत शासकीय विद्यालयों के प्रतिभावान विद्यार्थियों को नीट और जेईई जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं के लिए पूरी तरह नि:शुल्क कोचिंग दी जा रही है। इस अभियान की शुरुआत को स्वामी आत्मानंद झाड़ू राम देवांगन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, दुर्ग में हुई।

योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण व कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली बच्चों को अपने ही जिले में उत्कृष्ट मार्गदर्शन देकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में सफलता दिलाना और सरकारी स्कूलों का नाम रोशन करना है। कक्षाओं के पहले दिन चयनित छात्र-छात्राओं में गजब का जोश और ललक देखने को मिली। अनुभवी विषय-विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के बदलते पैटर्न, समय प्रबंधन, तैयारी की सटीक रणनीति और विषयों की बुनियादी अवधारणाओं से रूबरू कराया। इस दौरान शिक्षा संभाग दुर्ग के संयुक्त संचालक डॉ. केवी राव स्वयं एक विषय-विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने शिक्षकों और ​छात्रों दोनों को यह व्यावहारिक मंत्र दिया कि भौतिकी और गणित जैसे कठिन समझे जाने वाले विषयों को रोजमर्रा की जिंदगी के उदाहरणों और रोचक कहानियों से कैसे जोड़ा जाए।

कहानियों से जुड़ेंगे सिद्धांत, तो आसान होगी राह कक्षाओं के दौरान शिक्षा संभाग दुर्ग के संयुक्त संचालक डॉ. के. वी. राव स्वयं एक विषय-विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने पूरे माहौल में नई ऊर्जा भर दी। उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को यह व्यावहारिक मंत्र दिया कि भौतिकी और गणित जैसे कठिन समझे जाने वाले विषयों को रोजमर्रा की जिंदगी के उदाहरणों और रोचक कहानियों से कैसे जोड़ा जाए। उनका स्पष्ट कहना था कि जब कोई छात्र किसी सिद्धांत को अपने आस-पास की दुनिया में घटते देखता है, तो विषय बोझ नहीं बल्कि जिज्ञासा बन जाता है।

अभावों को मात देकर राष्ट्रीय मुकाम छुएंगे होनहार सुपर-80 कोचिंग का शुभारंभ किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभाशाली ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों को सशक्त बनाना है, जो सही मंच और मार्गदर्शन की कमी से पीछे छूट जाते थे। अब वे अपने गृह जिले में ही उच्च स्तरीय तैयारी कर सकेंगे। -गजेंद्र यादव, शिक्षा मंत्री छग शासन

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