
किसानों और आम लोगों के बीच बिचौलियों की भूमिका खत्म करने इस बाजार को शुरू किया गया था। एक-दो महीने तक बाजार चलने के बाद अफसर इसका सिस्टम ही नहीं बना पाए। इस वजह से पूरी योजना ही फेल हो गई। किसानों ने भी इस बाजार से पूरी तरह से दूरी बना ली है।
रात में असामाजिक गतिविधियां
स्थानीय लोगों के अनुसार रात में बाजार परिसर में शराबखोरी और जुआ खेलने वालों का जमावड़ा लगा रहता है। लोगों का आरोप है कि जिस जगह किसानों और उपभोक्ताओं के लिए बाजार विकसित किया गया था, वह अब असामाजिक गतिविधियों का ठिकाना बन गया है। रात में इस रास्ते से निकलने में भी डर लगने लगा है। क्योंकि नशा करने वाले सड़क से गुजरने वालों से विवाद करते हैं।