
इस मामले में पीड़ित महिला की आपत्ति के बाद IPS प्रशांत अग्रवाल की जगह महिला IPS पारुल माथुर को पक्ष रखने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, ADG दीपांशु काबरा को जांच अधिकारी बनाया गया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया है।
दरअसल, इस मामले में पीड़िता SI की पत्नी ने प्राथमिक जांच में पक्षपात का आरोप लगाते हुए रतन लाल डांगी को बचाने की कोशिश का आरोप लगाया था। पीड़िता ने किसी महिला IAS अधिकारी से जांच कराने की मांग की थी। पीड़िता की याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन के गृह सचिव और DGP से जवाब मांगा था।
SI की पत्नी ने लगाया सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप
दरअसल, पुलिस विभाग में पदस्थ SI की पत्नी ने IPS डांगी पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाया था। पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि पिछले 7 साल से IPS डांगी उसका शारीरिक और मानसिक शोषण कर रहे हैं।
यौन-उत्पीड़न के आरोपों के बीच IPS डांगी को पद से हटा दिया गया था। गृह विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता ने इसका आदेश जारी किया था। बाद में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। हालांकि, इन आरोपों को रतनलाल डांगी ने झूठा बताया था।
यौन-शोषण का आरोप प्रमाणित, आरोप-पत्र जारी
पीड़िता के वकील अभिषेक पांडेय ने बताया कि, 14 अक्टूबर को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान डीजीपी ने जवाब में बताया कि, प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद सस्पेंडेड आईपीएस रतनलाल डांगी के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया गया है।
IPS दीपांशु काबरा करेंगे जांच
डीजीपी ने कोर्ट को यह भी बताया कि, एडीजी दीपांशु काबरा को जांच अधिकारी बनाया गया है। पूर्व में IPS प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाने की जानकारी दी गई थी, जिस पर पीड़िता की तरफ से आपत्ति की गई। उनका कहना था कि महिला अपराध से संबंधित इस सेंसिटिव केस की जांच में महिला अफसर की नियुक्ति की जानी चाहिए।
उनकी आपत्ति के बाद गृह सचिव ने प्रस्तुतकर्ता अधिकारी आईपीएस प्रशांत अग्रवाल को बदलकर उनकी जगह पारुल माथुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया है। इसके साथ ही गृह सचिव और डीजीपी के जवाब से संतुष्ट होकर हाईकोर्ट ने केस को निराकृत कर दिया है।