
किसी व्यक्ति का नाम राष्ट्रपति होने को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने आपत्ति दर्ज की है। कांग्रेस नेता ने संवैधानिक पदों के नामों पर स्पष्ट नीति और कानूनी प्रावधान बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में पदों को लेकर किसी का नाम ना रखा जाए।
कांग्रेस नेता की इस याचिका पर राष्ट्रपति सचिवालय ने संज्ञान लिया और संबंधित केंद्रीय विभागों को पत्र भेजा है। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय में भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। इस मामले में ग्रामीण ‘राष्ट्रपति’ ने कहा कि उन्हें पता चला है कि उनके नाम की चर्चा दिल्ली तक पहुंच गई है।
उन्होंने बताया कि माता-पिता ने उनका नाम राष्ट्रपति रखा था। हालांकि, गांव में लोग उन्हें राजपति के नाम से जानते हैं। उन्होंने यह भी कहा ‘अपने नाम को लेकर अजीब भी लगता है, क्योंकि हम पेशे से मजदूर हैं और ये इतना बड़ा नाम है।’
अब जानिए पूरा मामला
दरअसल, घुटरा गांव के रहने वाले राष्ट्रपति पेशे से मजदूर हैं। वह मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। गांव के लोग उन्हें आमतौर पर ‘राजपति’ कहकर बुलाते हैं। हालांकि, स्कूल की मार्कशीट और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेजों में उनका नाम ‘राष्ट्रपति’ ही दर्ज है।
जानकारी के अनुसार, प्राथमिक स्कूल घुटरा के दाखिला रजिस्टर में 14 जुलाई 1988 को भी उनका नाम राष्ट्रपति ही लिखा गया था।
संवैधानिक पदों से जुड़े शब्दों पर स्पष्ट नियम बनाने की मांग
इस मामले को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने किसी व्यक्ति का नाम राष्ट्रपति होने को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने इस मामले को लेकर भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को अलग-अलग पत्र लिखा है।
कांग्रेस नेता सौरव मिश्रा ने अपनी याचिका में मांग की है कि ‘राष्ट्रपति’, ‘प्रधानमंत्री’, ‘मुख्यमंत्री’, ‘राज्यपाल’ और ‘भारत’ जैसे शब्दों को लोगों के नाम के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर साफ नियम बनाए जाएं।