
मामला वैशालीनगर थाना क्षेत्र का है। गिरफ्तार महिलाओं की पहचान बबली साहू उर्फ बबली निरंजन (42) और ज्योति निरंजन (27) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, बबली के खिलाफ सुपेला थाने में पहले भी कर्जा एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं।
72,500 रुपए देने के बाद भी मांगी अतिरिक्त रकम
ASP सिटी शोभराज अग्रवाल ने बताया कि वैशालीनगर निवासी पूनम मनोज कुमार ने 27 अक्टूबर को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि साल 2024 में 50 हजार रुपए ब्याज पर लिए थे। इसके बदले सुरक्षा के तौर पर ब्लैंक चेक और हस्ताक्षर किया हुआ कोरा स्टाम्प पेपर दिया था।पूनम का आरोप है कि वह 29 सप्ताह तक हर सप्ताह 2,500 रुपए के हिसाब से कुल 72,500 रुपए दे चुकी थी। इसके बाद भी उससे 1 लाख 50 हजार रुपए अतिरिक्त मांगे जा रहे थे।
पैसे देने में देरी पर जान से मारने की धमकी का आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाया कि रकम देने में देरी होने पर आरोपी गाली-गलौज करते थे और जान से मारने की धमकी देते थे। आरोपियों ने पूनम और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर दबाव बनाया।
पूनम की सहेली सुमिता तब्बोली ने भी शिकायत में बताया कि उसने 1 लाख रुपए ब्याज पर लिए थे। इसके बदले 28 सप्ताह तक हर सप्ताह 5 हजार रुपए के हिसाब से कुल 1 लाख 40 हजार रुपए चुका दिए थे। इसके बाद भी उसे परेशान करने और धमकी देने का आरोप है।
तलाशी में 3.79 लाख रुपए नकद मिले
शिकायत मिलने के बाद वैशालीनगर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की और ब्याज के लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। तलाशी के दौरान बबली साहू के कब्जे से 99 हजार 900 रुपए नकद मिले।
वहीं, सीमा यादव के मकान की तलाशी में करीब 2 लाख 80 हजार रुपए बरामद किए गए। इस तरह कुल 3 लाख 79 हजार 900 रुपए नकद जब्त किए गए।
इसके अलावा ब्याज के लेन-देन का हिसाब रखने वाली डायरी, अलग-अलग बैंकों के ब्लैंक चेक और कोरे स्टाम्प पेपर भी जब्त किए गए हैं। पुलिस इन दस्तावेजों की जांच कर रही है।
बबली के खिलाफ पहले भी दर्ज हैं दो मामले
पुलिस के मुताबिक, बबली साहू उर्फ बबली निरंजन के खिलाफ सुपेला थाने में पहले भी कर्जा एक्ट सहित अन्य धाराओं में दो मामले दर्ज हैं। इनमें अपराध क्रमांक 138/2026 और 1138/2026 शामिल हैं।
पुलिस ने बबली और ज्योति निरंजन को 28 अक्टूबर को गिरफ्तार किया। दोनों को न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 296, 308(5), 3(5) और कर्जा एक्ट की धारा 4 के तहत केस दर्ज किया है।