विडम्बना: आजादी के सात दशक बाद भी पक्की सड़क से महरूम आदिवासी, दो साल से अधूरा पड़ा निर्माण कार्य

Chhattisgarh Crimes युमेन्द्र कश्यप/मैनपुर। आदिवासी बाहुल्य विकासखंड मैनपुर के वनांचल और अभ्यारण क्षेत्र में आज भी ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। इसका एक उदाहरण राष्ट्रीय राजमार्ग-130 सी के डूमरपड़ाव से जांगड़ा तक जाने वाला मार्ग है, जहां पक्की सड़क का सपना अब तक अधूरा है। सड़क निर्माण कार्य लंबे समय से बंद पड़ा है, जिसके चलते ग्रामीणों को आज भी कच्चे और असुविधाजनक रास्ते से आवागमन करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत डूमरपड़ाव से जांगड़ा तक पक्की सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण के लिए 237.70 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई थी। निर्माण कार्य प्रारंभ करने की तिथि 30 दिसंबर 2024 तथा कार्य पूर्ण करने की संभावित तिथि 29 दिसंबर 2025 निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद सड़क निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बाद भी मार्ग का निर्माण पूरा नहीं हो सका है।

सड़क के अभाव में क्षेत्र के ग्रामीणों को आवागमन के दौरान कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विशेषकर बारिश के दिनों में कच्चा रास्ता और भी दुर्गम हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि कार्य सहित अन्य जरूरी कामों के लिए आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

गौरतलब है कि अभ्यारण क्षेत्र में निवासरत ग्रामीण लंबे समय से सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग करते आ रहे हैं। अपनी समस्याओं को लेकर ग्रामीण कई बार शासन-प्रशासन के समक्ष आवेदन-निवेदन कर चुके हैं, यहां तक कि अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता भी अपना चुके हैं। इसके बावजूद सड़क निर्माण में हो रही देरी ग्रामीणों की परेशानियों को कम नहीं कर पा रही है।

अब ग्रामीणों को इंतजार है कि जिम्मेदार विभाग इस अधूरे निर्माण कार्य को कब पूरा कराएगा और उन्हें पक्की सड़क की सुविधा कब मिलेगी। सवाल यह है कि विकास की योजनाओं में लाखों रुपये की स्वीकृति मिलने के बाद भी वनांचल के इन ग्रामीणों तक बुनियादी सुविधा पहुंचने में इतनी देरी क्यों हो रही है?

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