
■ सीमित संसाधनों के बीच उम्मीद की किरण
शिक्षिका सोनाली मडामे की पाठशाला एक ऐसे वनांचल क्षेत्र में स्थित है, जहां आज भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। तमाम प्रशासनिक और भौगोलिक चुनौतियों के बीच भी वे अपने दृढ़ संकल्प के सहारे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रही हैं। उनका उद्देश्य केवल बच्चों को पाठ्यपुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर भविष्य के अवसरों के लिए तैयार करना और उनके भीतर आत्मविश्वास जगाना है।
■ नवोदय और एकलव्य विद्यालयों के लिए गढ़ रहीं भविष्य
सोनाली मडामे की कार्यशैली सिर्फ विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने विद्यार्थियों को नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं के लिए भी विशेष रूप से तैयार करती हैं। उनकी व्यक्तिगत मेहनत और उत्कृष्ट मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि वनांचल के इन बच्चों को देश और राज्य के इन प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालयों में प्रवेश के स्वर्णिम अवसर मिल रहे हैं।
यह उपलब्धि न सिर्फ बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह गरियाबंद के वनांचल क्षेत्र में शिक्षा की बदलती तस्वीर और असीम संभावनाओं को भी एक नई दिशा दे रही है।