
हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और कोचिंग में पढ़ने वालों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उनकी जिम्मेदारी होगी। नियम तोड़ने पर 10 हजार से 5 लाख रुपए तक जुर्माना लग सकता है। गंभीर मामलों में कोचिंग सेंटर का रजिस्ट्रेशन रद्द भी किया जा सकेगा।
दरअसल, राज्य सरकार कोचिंग सेंटरों के संचालन के लिए नया कानून बनाने जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए छत्तीसगढ़ कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक-2026 का प्रारूप तैयार किया है।
ये संस्थान के संचालन और नियमों के पालन पर नजर रखेंगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाने के साथ गंभीर मामलों में कोचिंग सेंटर का पंजीकरण रद्द किया जा सकेगा।
पांच साल के लिए मिलेगा रजिस्ट्रेशन
प्रस्तावित विधेयक के मुताबिक, 20 या इससे अधिक विद्यार्थियों वाले कोचिंग सेंटरों को पंजीकरण कराना होगा। इसकी वैधता पांच साल होगी। संस्थानों को फीस और पाठ्यक्रम की जानकारी पारदर्शी तरीके से देनी होगी। यदि कोई विद्यार्थी बीच में कोचिंग छोड़ता है तो उसे नियमानुसार फीस वापस करनी होगी।
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए काउंसलिंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों के निराकरण के लिए व्यवस्था बनाने के साथ 24 घंटे हेल्पलाइन शुरू करने का प्रावधान है। जिन कोचिंग संस्थानों के साथ हॉस्टल संचालित होते हैं, वहां विद्यार्थियों की सुरक्षा के इंतजाम भी नियमों के दायरे में आएंगे। यानी कोचिंग संचालकों की जिम्मेदारी सिर्फ कक्षा में पढ़ाई कराने तक सीमित नहीं रहेगी।
सात दिन में दे सकेंगे सुझाव विधेयक अभी प्रारूप के स्तर पर है। इसे अंतिम रूप देने से पहले उच्च शिक्षा विभाग ने अभिभावकों, विद्यार्थियों, शिक्षाविदों और आम नागरिकों से सात दिनों के भीतर सुझाव और अभिमत मांगे हैं। विधेयक का प्रारूप विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा। इच्छुक लोग अपने सुझाव और आपत्तियां che-higheredu.cg@gov.in पर भेज सकते हैं।