
इसके साथ ही 27 अलग-अलग मोबाइल ऐप और पोर्टल पर रोज जानकारी भी भरनी होती है। हाल ही में लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी कर्मचारियों के लिए आई-जीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। इसके बाद शिक्षक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि शिक्षक का काम बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन उन्हें अलग-अलग विभागों के ऑनलाइन कामों में लगा दिया गया है। इससे स्कूलों में पढ़ाई का समय कम हो रहा है और शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि विभाग समय-समय पर नया ऐप डाउनलोड करने का आदेश दे देता है। कई बार तय समय में काम पूरा नहीं करने पर वेतन रोकने जैसी चेतावनी भी दी जाती है। इससे शिक्षक पढ़ाने के बजाय मोबाइल पर जानकारी भरने में ज्यादा समय दे रहे हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
शिक्षकों का कहना है कि हर दिन अलग-अलग ऐप और पोर्टल पर जानकारी अपडेट करनी पड़ती है। इसमें काफी समय लग जाता है। उनका कहना है कि अगर गैर-शैक्षणिक काम कम किए जाएं तो वे बच्चों को ज्यादा समय दे पाएंगे।
27 ऐप और पोर्टल पर करना पड़ता है काम
शिक्षकों के अनुसार उन्हें ई जादुई पिटारा, वोटर हेल्पलाइन, बीएलओ ऐप, आयुष्मान ऐप, दीक्षा, सीजी एमडीएम, सीजी वीएसके, आई-जीओटी कर्मयोगी, उल्लास, टीबीसी बुक स्कैन, समग्र शिक्षा, एसएचवीआर, जीपी ऐप, पढ़ई तुंहर द्वार, टेलीप्रैक्टिस, शाला कोष, सुगम संदेश, चॉकलिट, जेडआईआईईआई, निष्ठा, रीड अलॉन्ग, विनोबा, सीजी स्कूल डॉट इन और एचएलओ समेत कुल 27 ऐप और पोर्टल पर काम करना पड़ता है।