
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने इन दरों को अनुमोदन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) को भेज दिया है।
आयोग की स्वीकृति मिलते ही उपभोक्ताओं को ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त बिजली का भुगतान आगामी बिजली बिलों में क्रेडिट (छूट) के रूप में दिया जाएगा। इससे सोलर संयंत्र लगाने वाले उपभोक्ताओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
ऐसे काम करती है नेट मीटरिंग
योजना के तहत नेट मीटरिंग व्यवस्था लागू है। इसमें सोलर प्लांट से उत्पन्न बिजली का उपयोग पहले उपभोक्ता अपनी घरेलू खपत के लिए करता है। इसके बाद बची हुई अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेज दी जाती है। वित्तीय वर्ष के अंत में इस अधिशेष बिजली का तय दरों के अनुसार भुगतान किया जाता है।
हर नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में यूनिट का हिसाब शून्य से शुरू होता है। पिछले वर्ष की बची हुई यूनिटों का लाभ नए बिल में यूनिट के बजाय रुपयों के क्रेडिट के रूप में दिखाया जाता है।
राजनांदगांव क्षेत्र में 3856 सौर संयंत्र स्थापित
कार्यपालक निदेशक शिरीष सेलट ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत राजनांदगांव क्षेत्र में अब तक 3,856 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। क्षेत्र के चार जिलों में 2,835 उपभोक्ताओं को केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से हस्तांतरित की जा चुकी है।
नेट मीटरिंग के साथ तुरंत मिल रही सब्सिडी
विद्युत विभाग के विशेष अभियान के तहत नेट मीटरिंग की प्रक्रिया पूरी होते ही पात्र उपभोक्ताओं के खातों में सब्सिडी राशि सीधे भेजी जा रही है। विभाग का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं को योजना का लाभ तेजी से मिल रहा है और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी मदद मिल रही है।