
संघ का कहना है कि प्रदेश के कोटवार लंबे समय से शासन-प्रशासन और आम जनता के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त पारिश्रमिक, सामाजिक सुरक्षा और सेवा संबंधी लाभ नहीं मिल रहे हैं। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं नहीं मिलने से आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें लंबे समय से अस्थायी रूप से कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण की बात कही गई है। इसी आधार पर संघ ने कोटवारों को नियमित कर राजस्व विभाग में संविलियन करने की मांग की है।
वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव
संघ ने वर्तमान पारिश्रमिक बढ़ाकर सेवा भूमि के आधार पर नई वेतन व्यवस्था लागू करने की मांग रखी है। प्रस्ताव के अनुसार—
- बिना सेवा भूमि वाले कोटवारों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह।
- 3 से 7.50 एकड़ सेवा भूमि वालों को 12 हजार रुपये।
- 7.50 से 10 एकड़ सेवा भूमि वालों को 10 हजार रुपये।
- 10 एकड़ से अधिक सेवा भूमि वालों को 8 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएं।
अन्य मांगें भी उठाईं
संघ ने कोटवारों की नियुक्ति में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने, सेवानिवृत्त कोटवारों के पात्र परिजनों को प्राथमिकता देने, राजस्व अधिकारियों द्वारा कराई जा रही कथित बेगार बंद करने और बिना निष्पक्ष जांच किसी भी कोटवार पर कार्रवाई नहीं करने की मांग की है।
इसके अलावा, नगर पालिका क्षेत्रों में कोटवारों की नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाने और सभी लंबित मांगों पर जल्द शासनादेश जारी करने की भी मुख्यमंत्री से अपील की गई है।