
नोटिस मिलने के बाद ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि कई परिवार पिछले 25 से 50 वर्षों से इसी स्थान पर रह रहे हैं। यहां उनकी कई पीढ़ियां बसी हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि अगर मकान अवैध थे तो इतने वर्षों तक प्रशासन ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।
शुक्रवार को ग्रामीणों ने नोटिस हाथ में लेकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना है कि नोटिस के बाद पूरे गांव में भय और असमंजस का माहौल है।
एनआरडीए का कहना है कि नोटिस जारी करना वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। तूता के कुछ ग्रामीणों को अतिक्रमण से संबंधित नोटिस दिए गए हैं। सभी प्रभावित पक्षों से 6 जुलाई तक जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल वहां कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है।
नकटी के बाद बढ़ी संवेदनशीलता
तूता गांव का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। वहां बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवारों के बेघर होने का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी गरमा गया था। अब तूता में नोटिस जारी होने के बाद ग्रामीणों में वैसी ही आशंकाएं पैदा हो गई हैं।