
रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव होगा। मंदिर परिसर में सभी धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के तीनों रथ आकर्षक ढंग से सजाए गए हैं।
रथयात्रा भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व
मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष और विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। साल में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का प्रतीक भी है।
11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन और अभिषेक
रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडित विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराएंगे। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की ध्वनि के बीच भगवान तीनों रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री करेंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा
परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के सामने सोने की झाड़ू से ‘छेरा पहरा’ की ऐतिहासिक सेवा करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है।
आयोजन में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।
भजन, झांकियां और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर
रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों की ओर से भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां, पारंपरिक लोकनृत्य और “जय जगन्नाथ” के जयघोष से मंदिर परिसर और पूरा शहर भक्तिमय माहौल में रंग जाएगा।
श्रद्धालुओं से शामिल होने की अपील
श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लेने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है।