
रायपुर में रथयात्रा से पहले एक अनोखी परंपरा भी निभाई जाती है। महाप्रभु के रथ के मार्ग की सफाई साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा किलो वजनी दो सोने की झाड़ुओं से की जाती है। एक झाड़ू राज्यपाल और दूसरी मुख्यमंत्री के हाथ में होती है। दोनों महाप्रभु के रथ के आगे झाड़ू लगाकर पुरी की सदियों पुरानी ‘छेरापहरा’ परंपरा निभाते हैं।
रथयात्रा से पहले शहर के विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। मंदिरों को फूलों से सजाया गया है। जिन रास्तों से रथयात्रा निकलेगी, वहां साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गई हैं।
रथयात्रा के दौरान कई इलाकों में भीड़ और ट्रैफिक बढ़ सकता है। लोगों से अपील की गई है कि घर से निकलने से पहले रथयात्रा के रूट की जानकारी ले लें और ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें।
ओडिशा के कलाकारों ने संवारी रथ और मंदिर की भव्यता
रथयात्रा की तैयारियों के तहत इस बार भी ओडिशा से आए कलाकार गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक शैली की पेंटिंग और आकर्षक सजावट कर रहे हैं। मंदिर की दीवारों, प्रवेश द्वार और रथों को पुरी की तर्ज पर रंग-बिरंगे धार्मिक चित्रों और पारंपरिक अलंकरण से सजाया जा रहा है।
वहीं महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की पूजा-अर्चना और रथयात्रा के सभी धार्मिक अनुष्ठानों को विधि-विधान से संपन्न कराने के लिए ओडिशा से पुजारियों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि रायपुर में भी श्रद्धालुओं को पुरी जैसी आध्यात्मिक अनुभूति मिल सके।