दुर्ग जिले में सरकारी राशन वितरण प्रणाली में बड़ी गड़बड़ी सामने आई

Chhattisgarh Crimesदुर्ग जिले में सरकारी राशन वितरण प्रणाली में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। खाद्य विभाग और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए शासकीय उचित मूल्य दुकान के अध्यक्ष को गिरफ्तार किया है। जांच में ऑनलाइन रिकॉर्ड और दुकान में मौजूद राशन के बीच बड़ा अंतर मिला है। इससे लाखों रुपये के सरकारी चावल की हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है।

22 जुलाई 2026 को कलेक्टर (खाद्य शाखा) दुर्ग के निर्देश पर खाद्य निरीक्षक चंद्रकांत बघेल ने भिलाई नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में सेक्टर-07 मार्केट स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान (आईडी-431004118) के अध्यक्ष धनंजय सिंह राजपूत और विक्रेता नमिता सिन्हा पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए।

ऑनलाइन रिकॉर्ड और स्टॉक में बड़ा अंतर मिला

जांच के दौरान दुकान में मौजूद राशन का मिलान ऑनलाइन रिकॉर्ड से किया गया। मौके पर केवल 26.50 क्विंटल अरवा चावल मिला, जबकि रिकॉर्ड में 1034.01 क्विंटल चावल दर्ज था। यानी 1007.51 क्विंटल चावल कम पाया गया।

स्टॉक रजिस्टर नहीं मिला

जांच टीम को वितरण रजिस्टर, बैठक रजिस्टर और बारदाना रजिस्टर तो मिले, लेकिन सबसे जरूरी स्टॉक रजिस्टर नहीं मिला। अध्यक्ष ने बताया कि स्टॉक रजिस्टर विक्रेता के पास है, लेकिन इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका।

कमी का कारण नहीं बता सके अध्यक्ष

इतनी बड़ी मात्रा में चावल कम मिलने पर जांच समिति ने अध्यक्ष धनंजय सिंह राजपूत से जवाब मांगा। हालांकि वह चावल की कमी का कोई स्पष्ट कारण नहीं बता सके। इसके बाद पंचनामा तैयार कर बयान दर्ज किए गए और पूरी रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय को भेज दी गई।

नियमों के उल्लंघन की पुष्टि

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दुकान संचालकों ने छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश-2016 के कई नियमों और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया है। इसके आधार पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के तहत मामला दर्ज किया गया।

दस्तावेजों के आधार पर हुई गिरफ्तारी

भिलाई नगर थाना में अपराध क्रमांक 401/2026 दर्ज होने के बाद पुलिस ने दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की। पर्याप्त सबूत मिलने पर दुकान के अध्यक्ष धनंजय सिंह राजपूत (63 वर्ष), निवासी सेक्टर-07 भिलाई को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।

कालाबाजारी की आशंका, जांच जारी

प्रारंभिक जांच में सरकारी राशन की कालाबाजारी की आशंका सामने आई है। पुलिस और खाद्य विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में चावल कैसे गायब हुआ और इस मामले में अन्य लोगों की भी भूमिका है या नहीं।

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