दुर्ग में 15वें वित्त आयोग की राशि पर विवाद

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ के दुर्ग जनपद पंचायत सदस्य ने 8 जुलाई को केंद्र को पत्र लिखा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पंचायतों को आवंटित राशि का वितरण संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करते हुए किया गया है। इस पर केंद्रीय पंचायत राज मंत्रालय ने 15वें वित्त आयोग की धनराशि के वितरण को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार से तत्काल जांच रिपोर्ट मांगी है।

जनपद पंचायत सदस्य ढालेश साहू के मुताबिक, इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही और कई पात्र पंचायतों को उनका हक नहीं मिला है। इस शिकायत पर अब केंद्रीय मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजा है। मंत्रालय ने कार्रवाई और विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शिकायतकर्ता को भी कार्रवाई की जानकारी देने को कहा गया है।

जनपद CEO पर लगाया था पक्षपात का आरोप

यह विवाद तब गहरा गया, जब 4 अगस्त को कांग्रेस के 11 जनपद सदस्य विरोध कर रहे थे। इस दौरान जनपद सीईओ रूपेश पांडे ने विरोध कर रहे 11 विपक्षी सदस्यों से कथित तौर पर कहा कि, 5 साल इसी तरह भुगतना पड़ेगा। इस बयान के बाद विपक्ष ने जनपद सीईओ पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा था।

ये है विवाद की वजह

दरअसल, विवाद पिछले की वजह कार्यकाल के 76 लाख और वर्तमान में 1 करोड़ 59 लाख रुपए की राशि को लेकर है। कांग्रेस जनपद पंचायत का आरोप है कि भाजपा समर्थित 13 जनपद सदस्यों ने बहुमत के आधार पर रकम अपने क्षेत्रों के लिए आवंटित कर ली। कांग्रेस समर्थित 11 सदस्यों का कहना है कि इससे दुर्ग ग्रामीण जनपद क्षेत्र के 60 गांव विकास कार्यों से वंचित रह गए हैं।

जनपद सदस्य ने कहीं ये बातें

शिकायतकर्ता और जनपद सदस्य ढालेश साहू ने बताया कि 15वें वित्त आयोग की राशि का आवंटन सत्ता पक्ष के 13 सदस्यों को ही किया गया। 28 मई 2025 को सामान्य सभा में यह जानकारी मिलने पर उन्होंने जनपद अध्यक्ष और सीईओ को आवेदन देकर राशि का वितरण जनसंख्या और क्षेत्रफल के अनुपात में करने की मांग की थी।

इसके बाद उन्होंने कलेक्टर, प्रमुख सचिव और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को भी पत्र भेजे, लेकिन एक माह तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। 8 जुलाई को उन्होंने भारत सरकार के पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के उल्लंघन का आरोप लगाया। विभाग ने मामले में जांच के आदेश जारी कर राज्य के प्रमुख सचिव से जवाब मांगा है और आदेश की कॉपी शिकायतकर्ता को भी भेजी है।