मैनपुर में अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों की जांच के लिए कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापेमारी की। नर्सिंग एक्ट के नोडल डॉक्टर हरीश चौहान के नेतृत्व में 5 सदस्यीय टीम ने कार्रवाई की।
टीम ने सबसे पहले मैनपुर मुख्यालय से 100 मीटर दूर स्थित सरकार क्लिनिक का निरीक्षण किया। इसके बाद अमलीपदर मुख्य मार्ग के भाठी पारा में एक कमरे में चल रहे मल्टी स्पेशलिटी क्लिनिक की जांच की। दोनों जगह संचालक बिना अनुमति के क्लिनिक चला रहे थे। यहां दवाएं, इलाज के डिवाइस, खुली सुइयां और क्लिनिक संचालन के अन्य सबूत मिले।
टीम जब सरना बहाल पहुंची तो पता चला कि वहां के एक स्कूल शिक्षक भी अवैध रूप से मरीजों का इलाज कर रहा था। टीम के भाठी पारा में कार्रवाई की सूचना मिलते ही शिक्षक ने अपने क्लिनिक से सारी आपत्तिजनक सामग्री हटा दी। कई उपकरणों को स्कूल की प्रयोगशाला में छिपा दिया। टीम के पहुंचने पर बरामद सामग्री को उसने निजी उपयोग का बताया।
यह कार्रवाई गरियाबंद-पेंड्रा में एक आदिवासी युवक का इलाज करने वाले संजू मंडल के क्लिनिक की तलाश में की गई। टीम ने सभी अवैध क्लिनिक संचालकों को नोटिस जारी किया।
मैनपुर ब्लॉक में चल रहे झोलाछाप क्लीनिकों पर नकेल कसने की तैयारी
मैनपुर ब्लॉक के अमली पदर क्षेत्र में सक्रिय लगभग 30 अवैध मेडिकल क्लीनिक (झोलाछाप) हैं, इनमें कुछ बड़े तो कुछ छोटे। इनकी सहायता स्थानीय कुछ मेडिकल संचालक कर रहे हैं। जैसे ही छापे की खबर मिली, कई झोलाछाप ने अपने क्लीनिक बंद कर दिए। गोहरापदर में एक वेटरिनरी क्लीनिक जो इलाज करता था, वह भी अचानक बंद हो गया। अंजना क्लीनिक में ताला लटकता दिखा।
झोलाछाप इलाज के चलते एक मरीज की हुई मौत, एफआईआर दर्ज
बतादें कि अमली पदर इलाके में झोलाछाप के तौर पर संजू मंडल और बबलू तांडी ने पेंड्रा, गरियाबंद में एक 40 वर्षीय पुरुष की बवासीर का इलाज किया था। इस झोलाछाप इलाज के लिए उन्होंने 20 अगस्त को 30,000 रुपए की वसूली की थी। लेकिन 23 अगस्त को मरीज, पुरुषोत्तम ध्रुव की हालत बिगड़ गई।
उन्होंने बिना उचित उपचार दिए मरीज को बंद कमरे में छोड़ कर भाग गए, जिससे मरीज की मौत हो गई। 26 जुलाई को कोतवाली पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। इस घटना के बाद आयुक्त स्तर से अमली पदर क्षेत्र में ज़ोरदार कार्रवाई के आदेश भी जारी हुए
अब नर्सिंग एक्ट के तहत होगा पंजीकरण, कार्रवाई निरंतर जारी
इस मुद्दे पर कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे जिला नोडल अफ़सर हरीश चौहान ने बताया कि जहां भी नियम उल्लंघन के सबूत मिले हैं, वहां नोटिस भेजे जा रहे हैं। जो भी लोग क्लिनिक संचालित करना चाहते हैं, उन्हें नर्सिंग एक्ट के तहत औपचारिक पंजीकरण और लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। अवैध क्लिनिक संचालनों की सूचना पर कार्रवाई लगातार जारी रखी जाएगी।