
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी निरंजन दास ने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, तत्कालीन विशेष सचिव अरुणपति त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर और अन्य के साथ मिलकर एक सिंडिकेट खड़ा किया था।
इस गिरोह ने सरकारी शराब दुकानों में कमीशन तय करने, डिस्टलरियों से अतिरिक्त शराब बनवाने, विदेशी ब्रांड की अवैध सप्लाई कराने और डुप्लीकेट होलोग्राम के जरिए शराब बेचने जैसी गतिविधियों से राज्य को हजारों करोड़ का नुकसान पहुंचाया।
टेंडर दिलाने में निभाई थी भूमिका
चार्जशीट में दर्ज है कि, नोएडा की प्रिज्म होलोग्राफिक सिक्योरिटी फिल्म्स को टेंडर दिलाने में दास की अहम भूमिका रही। कंपनी अयोग्य होने के बावजूद शर्तें बदली गईं और उसे काम दिया गया। इसके बाद डुप्लीकेट होलोग्राम बनाकर अवैध शराब की बिक्री को वैध ठहराया गया। प्रति होलोग्राम आठ पैसे का कमीशन तय हुआ, जिससे करीब 1200 करोड़ का घाटा राज्य को हुआ।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दास और सिंडिकेट ने झारखंड की आबकारी नीति बदलवाने की साजिश रची। जनवरी 2022 में ढेबर और त्रिपाठी के साथ झारखंड अधिकारियों से बैठक कर छत्तीसगढ़ मॉडल लागू कराया गया।
रिटायरमेंट के बाद फरवरी 2023 में उन्हें संविदा पर आबकारी आयुक्त बनाया गया था। निरंजन दास की अग्रिम जमानत याचिकाएं कई बार खारिज हुईं। अब EOW उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में घोटाले की कई परतें और खुलेंगी।