छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के खपरी गांव में प्राथमिक शाला के बच्चे जर्जर स्कूल भवन के कारण खुले मैदान में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय लिया है। स्कूल की दीवारें और छत इतनी खराब हो चुकी हैं कि प्लास्टर गिर रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने का डर बना हुआ है।
हाल ही में, शनिवार सुबह स्कूल लगने के बाद अचानक एक दीवार ढहने लगी। शिक्षकों ने तुरंत बच्चों को स्कूल से बाहर निकाला और मैदान में पढ़ाई की व्यवस्था की। यह घटना बच्चों और शिक्षकों के बीच दहशत का कारण बनी। टीचरों के मुताबिक, खपरी प्राथमिक शाला में जर्जर भवन की समस्या कई दिनों से बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी कई बार दी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। वहीं अभिभावकों ने भी प्रशासन से कई बार शिकायत की है। उनका कहना है कि स्कूल की दीवारें छत से अलग हो रही हैं और कभी भी गिर सकती हैं। जर्जर भवन में सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का भी खतरा बना रहता है।
किराए के भवन में व्यवस्था कराने की मांग
पालक समिति ने फैसला किया है कि जब तक नया और सुरक्षित भवन नहीं मिल जाता, तब तक बच्चे स्कूल के बाहर ही पढ़ाई करेंगे। समिति ने ग्राम पंचायत भवन या किराए के भवन में बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था करने की भी मांग की है। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नया भवन उपलब्ध नहीं कराया गया, तो वे स्कूल में ताला लगा देंगे।
बैठने लायक भी स्थिति नहीं
शाला समिति के अध्यक्ष नैना साहू ने कहा ग्राम खपरी के प्राथमिक शाला में दोनों भवन की स्थिति काफी जर्जर है। जिसमें बैठने लायक भी नहीं है। कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। दीवार का कभी प्लास्टर गिरता है तो कभी और कुछ हो जाता है। बच्चों को अभी पढ़ाई के लिए शाला प्रांगण में बैठाया जा रहा है।
स्कूल में ताला बंदी की चेतावनी
स्कूल की सदस्य नंदनी साहू ने बताया स्कूल की स्थिति काफी जर्जर है। दिनों दिन प्लास्टर गिरते जा रहा है और भवन के लिए कई बार मांग कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि आगे सुनवाई नहीं होती है तो वह स्कूल में ताला बंद करेंगे। गांव में कई बड़े नेता आते हैं लेकिन स्कूल पर किसी की नजर नहीं जाती।
स्कूल में दो भवन, दोनों जर्जर
स्कूल के शिक्षक रेवाराम ने कहा स्कूल में दो भवन है और दोनों काफी जर्जर है। इस संबंध में प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया है। प्रधान पाठक के माध्यम से और शिक्षा समिति के माध्यम से। लेकिन अब तक स्कूल का कोई सुधार नहीं हुआ है।