छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तामार ब्लॉक में जेपीएल की प्रस्तावित कोल खदान के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। 14 गांव के ग्रामीण 5 नवंबर शाम से ही आंदोलन पर डटे हुए हैं। सोमवार को जनसुनवाई प्रस्तावित है, लेकिन सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण स्थल पर मौजूद हैं। जानकारी के मुताबिक, ग्रामीणों के समर्थन में लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार भी मौके पर पहुंचीं। ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई निरस्त किया जाए। उन्होंने जनसुनवाई के लिए टेंट न लगने देने के उद्देश्य से मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित खदान से उन्हें विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान और आजीविका पर संकट का खतरा है, इसलिए वे जनसुनवाई का कड़ा विरोध कर रहे हैं। मौके पर किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल मैदान जनसुनवाई के लिए निर्धारित स्थल था। लेकिन मैदान में जनसुनवाई न कराकर बाजार परिसर के अंदर कमरे भीतर गुपचुप तरीके से जनसुनवाई को संपन्न करा दिया गया। सुबह से काफी संख्या में फोर्स तैनात थी, लेकिन अब वह भी जा चुकी है। हालांकि, ग्रामीण मैदान में अब भी डटे हुए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, तमनार ब्लॉक में प्रस्तावित गारे–पेलमा कोल ब्लॉक सेक्टर-1 की जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों का विरोध जारी है। 5 नवंबर से ग्रामीण जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस आंदोलन में लगभग 14 गांवों के लोग शामिल हैं।
ग्रामीण धौराभांठा स्कूल मैदान में धरने पर बैठे हैं। इनमें झरना, आमगांव, कोसमपाली, पतरापाली, जांजगीर, गोढ़ी, कसडोल, महलोई, सरसमाल सहित कई गांवों के लोग शामिल हैं। ग्रामीण किसी भी नई कंपनी या कोयला खदान को इस क्षेत्र में शुरू नहीं होने देना चाहते।
उनका कहना है कि तमनार और आसपास का इलाका पहले से ही कंपनियों के कारण प्रदूषण की चपेट में है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। जल–जंगल–जमीन भी तेजी से नष्ट हो रहे हैं। प्रस्तावित कोयला खदान का हर हाल में विरोध करेंगे।