
बता दें कि विजयापुरम कॉलोनी में करीब 1500 मकान है। इस के पीछे ही अटल आवास है जहां की अधिकांश महिलाएं झाड़ू-पोछा, बर्तन करने विजयापुरम इलाके में आती है।
लेकिन अटल आवास से विजयापुरम तक पहुंचने वाला रास्ता सुरक्षा का हवाला देते हुए बंद कर दिया गया है, जिससे अब बाइयों को 4-5 किलोमीटर दूरी तय कर काम पर पहुंचना पड़ रहा। उनकी मांगों में सबसे प्रमुख यहीं मांग है कि इस रास्ते को खोला जाए नहीं तो आने जाने का अलग से भाड़ा दिया जाए।
क्या हैं बाइयों की मांगें?
- महीने का वेतन बढ़ाया जाए, क्योंकि मौजूदा मेहनताना मेहनत के हिसाब से कम है।
- हफ्ते में 3 दिन बिना पेमेंट कटे छुट्टी दी जाए।
- सभी बाइयों के लिए आई-कार्ड बनाए जाएं, ताकि उनकी पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
- सोसायटी तक पहुंचने वाले रास्ते को खोला जाए।
कई घरों में चाय तक नहीं बनी
शनिवार (17 जनवरी) सुबह सोसयटी के सामने सैकड़ों बाइयां एकजुट होकर धरने पर बैठ गईं, जिसका सीधा असर इलाके के घरों पर देखने को मिला। हालात ऐसे रहे कि कई घरों में सुबह की चाय तक नहीं बन पाई। कई घरों में टाइम पर नास्ता नहीं पाया।
महिला वकील बोली- काम पर नहीं पहुंची बाई, फोन भी नहीं उठाया
सोसायटी निवासी एक महिला एडवोकेड नुपूर ने बताया कि काम वाली बाई अचानक नहीं आई। ना ही फोन कर जानकारी दी है और फोन करने पर उठाई तक नहीं। अब हमें सफर करना पड़ रहा है। सारा काम छोड़कर कोर्ट जाना मेरी पहली प्रॉयरटी है।
सैलरी बढ़ाने को लेकर वकील नुपूर ने कहा कि काम का कोई फिक्स सैलरी नहीं है, सब जगह अलग-अलग रेट है। जितनी जरूरत हमें उनकी है उतनी ही जरूरत उन्हें हमारी है। दोनों को समझकर चलना होगा।
झाड़ू-पोछा, बर्तन सब बंद
हर दिन की तरह सुबह होते ही रोजमर्रा के कामों के लिए गृहणियां इंतजार करती रहीं , लेकिन झाड़ू-पोछा, बर्तन और खाना बनाने वाली बाइयां कहीं नजर नहीं आईं। घरों में काम ठप होने से महिलाओं की मुश्किलें काफी बढ़ गईं है।