
पूरन मेश्राम/मैनपुर। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में ओडिसा से भटक कर आई हथिनी जिसने अंतिम सांँसो तक अपनी जिदंगी की जंग लड़ी जहां वन अमला बीमार हथिनी को बचाने हर संभव प्रयास किया गया लेकिन हथिनी को बचाया नही जा सका। प्राप्त जानकारी के मुताबिक ओडिसा से भटक कर उदंती सीता नदी टाईगर रिजर्व क्षेत्र मे दाखिल हुई हथिनी जिसकी उम्र 10 से 12 साल बताई जा रही है जो बीमार के चलते हथिनी कुछ खा नहीं पा रही थी। इसकी जानकारी बीते 22 दिसंबर को उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के कर्मचारियों को लगी, जिसके बाद से हथिनी की हर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी, मादा हथिनी की तबीयत 15 जनवरी को अचानक एक बार फिर बिगड़ गई, एक सप्ताह से लगातार ईलाज किया जा रहा था लेकिन सारी कोशिशों के बाद आखिरकार बीमार हथिनी ने शनिवार 17 जनवरी की सुबह आखिरी सांस ली। विभाग ने पीएम के बाद मृत हथिनी का अंतिम संस्कार कर दिया है। उप निदेशक वरुण जैन ने बताया कि 22 दिसंबर को उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के कर्मचारियों को जानकारी मिली थी कि एक हथिनी कुछ खा नहीं पा रही है और उसका मल त्याग भी नहीं हो रहा है। यह हथिनी गरियाबंद और धमतरी होते हुए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व पहुंची थी, सात दिनों तक ईलाज में डॉक्टरो एवं स्टाफ के द्वारा हर संभव प्रयास किए गए, यहां तक कि यूएसटीआर के हाथी मित्र दल अपनी जान जोखिम में डालकर बीमार हथिनी को दवाईयां दे रहे थे लेकिन आज सुबह उसने अंतिम सांस ली इलाज के दौरान उसकी हालत में कुछ सुधार भी हुआ था। लेकिन 15 जनवरी को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद जंगल सफारी और कानन पेंडारी जू के डॉक्टरों की मदद से भी प्रयास किए गए, पर उसे बचाया नहीं जा सका। वन विभाग और अभयारण्य प्रशासन ने विधिवत हथिनी का अंतिम संस्कार किया। डीएफओ वरुण जैन ने बताया कि इससे पहले सितंबर 2025 में इसी तरह की गंभीर बीमारी से पीड़ित एक नर हाथी को सफलतापूर्वक बचाया गया था। उन्होंने कहा कि वन विभाग की प्राथमिकता हमेशा वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण रही है। गौरतलब है कि डीएफओ वरुण जैन लगातार वन्य प्राणियों और वन संपदा की हिफाज़त में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। इससे पहले भी उनके नेतृत्व में बीमार हाथियों का इलाज, तेंदुए के रेस्क्यू और उपचार के बाद उन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ा जा चुका है।