
लगभग 12 से 14 महीने के इस नर चीतल के गले में दोनों ओर जानवरों के दांतों से काटने के निशान पाए गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर घायल किया था। ग्रामीणों ने चीतल को कुत्तों से बचाकर वन विभाग को सूचना दी।
घायल चीतल को पहले लोरमी के पशु चिकित्सालय में प्रारंभिक उपचार दिया गया। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आगे के इलाज के लिए बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी भेजा गया है।
दूसरे चीतल की तलाश में जुटा वन विभाग
ग्रामीणों ने वन विभाग को बताया कि उन्होंने दो चीतल एक साथ देखे थे। आशंका है कि दूसरा चीतल घायल चीतल की मां थी, जो कुत्तों के हमले के बाद दूसरी दिशा में भाग गई। वन विभाग अब दूसरे चीतल की भी तलाश कर रहा है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि चीतल अचानकमार टाइगर रिजर्व के जंगल से भटककर रिहायशी इलाके में आ गया था।
एम्बुलेंस-पिंजरे के अभाव में बोलेरो से ले जाया गया
इस घटना में वन विभाग की कथित लापरवाही भी सामने आई है। प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व में से एक अचानकमार टाइगर रिजर्व के क्षेत्र से संबंधित होने के बावजूद, घायल चीतल को ले जाने के लिए वन विभाग के पास न तो एम्बुलेंस उपलब्ध थी और न ही कोई पिंजरा। दर्द से छटपटाते चीतल को सरकारी बोलेरो वाहन के पीछे रखकर ले जाया गया।