छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से सटे ओडिशा के एक निजी हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद गर्भवती, नवजात और उसके तीन साल के बेटे को बंधक बनाने का मामला सामने आया

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से सटे ओडिशा के एक निजी हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद गर्भवती, नवजात और उसके तीन साल के बेटे को बंधक बनाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार भुजिया जनजाति से है। धर्मगढ़ स्थित मां भंडारणी क्लिनिक में डिलीवरी के बाद 15 हजार नहीं चुकाने पर तीनों को प्रबंधन ने 6 दिन तक बंधक बनाकर रखा। मैनपुर की रहने वाली नवीना चींदा (23 साल) को लेबर पेन होने पर परिवार उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचा। वहां नॉर्मल डिलीवरी होने पर 20 हजार का बिल बना। परिवार सिर्फ 5 हजार ही चुका पाया, 15 हजार कहीं से भी लाकर देने की बात कही। पीड़िता की सास पैसों के इंतजाम के लिए गांव वापस लौटी।

 

मामला मीडिया में आया तो जवाब लेने जब पत्रकार संचालक के पास पहुंचे तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि परिवार ने पैसों की दिक्कत बताई होती तो उन्हें पहले ही जाने देते। वहीं, संचालक चैतन्य मेहेर ने कैमरा भी बंद करवा दिया जिसके बाद मां, नवजात और उसके 3 साल के बेटे को एंबुलेंस से गांव भेजा गया। अब जानिए पूरा मामला

 

जिले के आदिवासी ब्लॉक मैनपुर के मूचबहल के मालिपारा वार्ड की रहने वाली नवीना चींदा को 18 जनवरी को लेबर पेन उठा। जिसके बाद कालाहांडी के धर्मगढ़ स्थित मां भंडारणी क्लिनिक में भर्ती कराया गया था।

 

उसी दिन नॉर्मल डिलीवरी के बाद उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया। अस्पताल में भर्ती के समय 5,000 रुपए जमा किए गए थे, लेकिन प्रसव के बाद और 15 हजार रुपए की मांग की गई।

 

पति झारखंड में मजदूरी करता है

 

प्रसूता की सास दोषो बाई ने बताया कि पैसे का इंतजाम करने के लिए वह 21 जनवरी को गांव लौट आईं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा पोड़ा आंध्र प्रदेश में ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता है और वह भी पैसे का इंतजाम नहीं कर पा रहा था।